ऐसे करें करियर का चुनाव, लक्ष्य पाना होगा आसन

यह उलझन हर उस विद्यार्थी की है, जो विषयों के विकल्पों के बीच अपना भविष्य तलाश रहा है। एक समय था, जब सीमित ही विकल्प होते थे जैसे इंजीनियिंरग, मेडिकल एवं सिविल सर्विसेस। अच्छे विद्यार्थी इन्हीं की ओर रुख करते थे। लेकिन आज उसके समक्ष इतने विकल्प हैं कि वह भ्रमित हो जाता है और अगर उसने सही तरीके से विषय का चुनाव नहीं किया तो उसका भविष्य ही दांव पर लग जाता है। कुछ मुख्य बिंदु जिन पर आपको विचार करना चाहिए

लक्ष्य पहले से सुनिश्चित कीजिए

आपको क्या बनना है, इसकी सोच आपको पहले से ही सुनिश्चित कर लेनी चाहिए। जब लक्ष्य सुनिश्चित होता है, तो आप सही दिशा में आगे बढ़कर प्रयास करते हैं, वहीं भ्रम आपको दिशाहीन कर देता है। इस समय देश में जिस तरह से नए-नए संस्थान खुल रहे हैं तथा वहां पढ़ने वालों की तादाद बढ़ रही है, उसके मुताबिक शिक्षा का स्तर नहीं बढ़ा है इसलिए हर साल महाविद्यालयों से हजारों की तादाद में तकनीकी या गैर तकनीकी स्नातकों के निकलने के बाद भी नौकरियां नहीं मिलती हैं। जहां तक सही कोर्स चुनने का सवाल है, तो छात्रों को सबसे ज्यादा शीघ्र नौकरी मिलने वाले क्षेत्रों का ध्यान रखना होगा।

अपने करियर की योजना बनाएं

आज हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। व्यावसायिक विषयों में सीमित प्रवेश संख्या होती है, प्रतिस्र्पिधयों की संख्या ज्यादा है। आप में भले ही बहुत प्रतिभा या क्षमता हो, मेरिट हो, लेकिन मुमकिन है कि पसंद के कोर्स या कॉलेज में दाखिला न मिले। इसके लिए जरूरी है कि एक अलग योजना तैयार रहे। विकल्पों के लिए करियर काउंसलर, शिक्षकों, पुराने छात्रों या किसी की भी मदद ली जा सकती है।

सही विषय का करें चुनाव

12वीं के बाद कोई खास कोर्स चुनना एक विद्यार्थी की रुचि और विकल्पों पर निर्भर करता है। अगर आप कलाकार या रचनाशील हैं तो विज्ञापन, फैशन, डिजाइन जैसे कोर्सेज चुन सकते हैं। अगर आपका दिमाग विश्लोषक हैं तो आपके लिए इंजीनियिंरग या टेक्नोलॉजी के क्षेत्र बेहतर होंगे। यहां बहुत सारे विशेषज्ञ कोर्सेज भी हैं जिन्हें करने के बाद करियर में ऊंची उड़ान भर सकते हैं। ऐसे में छात्र जब भी किसी खास कोर्स या प्रोग्राम में दाखिला कराने जाएं तो एक बात स्पष्ट रखें कि उस प्रोग्राम को चुनने के पीछे करने का उनका मकसद क्या है? फिर भी अगर भ्रम बना रहे तो अपना प्रोफाइिंलग टेस्ट कराएं। इससे आपको अपनी शक्ति का पता लग सकेगा और आप उसके मुताबिक कोर्स सिलेक्ट कर सकेंगे। कोर्स का सिलेक्शन करते समय इन खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

विकल्प तलाशें

एक समय था, जब विकल्प सीमित थे। विज्ञान विषय के छात्रों के पास सिर्फ मेडिकल या इंजीनियिंरग के विकल्प होते थे, लेकिन अब वह दौर नहीं रहा। आज आपके सामने विकल्पों की भरमार है। आप बायोटेक्नोलॉजी, बायोइंजीनियिंरग, फिजियोथैरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी, मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन जैसे कोर्सेज कर सकते हैं। इसी तरह आट्र्स से 12वीं करने वाले बिजनेस या होटल मैनेजमेंट कोर्स कर रिटेिंलग, हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म इंडस्ट्री का हिस्सा बन सकते हैं। जो लोग रचनाशील हैं, वे फैशन डिजाइिंनग, मर्चेंडाइिंजग, स्टाइिंलग का कोर्स कर सकते हैं।

संस्थान का चुनाव

आजकल संस्थानों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा होती है लेकिन सरकारी एवं प्राइवेट संस्थानों में प्रवेश लेने से पहले निम्न बिंदुओं पर जरूर विचार कर लें- पहले यह पता कर लेना चाहिए कि उस संस्थान को समुचित रेगुलेटरी अथॉरिटी से मान्यता हासिल है या नहीं?

फैकल्टी की गुणवत्ता। प्रोफेसर, लेक्चरर और असिस्टेंट प्रोफेसर का अनुपात। पाठयक्रम विविधता। प्लेसमेंट या नौकरी मिलने का प्रतिशत। मूलभूत सुविधाएं।

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