सीएमए परीक्षा को इस तरह कर पाएंगे क्लियर

कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट फाइनल (सीएमए) परीक्षा में एक साथ दोनों ग्रुप पास करने वाले अमित कहते हैं कि इस परीक्षा के विस्तृत सिलेबस को बांटकर पढ़ना और रिविजन करते रहना लाभप्रद रहता है। कभी भी आप असफलता से घबराएं नहीं बल्कि उससे सबक लेकर निरंतर आगे बढ़ते रहें। फोकस्ड स्टडी करें और जो भी लक्ष्य तय करें, उसे हासिल करने के लिए ईमानदारी से तैयारी करें।

यह कहना है अमित कुमार अग्रवाल का, जिन्होंने द इंस्टीटयूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) द्वारा आयोजित कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (सीएमए) फाइनल जून 2016 की परीक्षा में एक साथ दोनों ग्रुप पास किए हैं। अमित सलाह देते हैं कि सीएमए का सिलेबस काफी बड़ा होता है। ऐसे में इसे बांटकर पढ़ाई करें और जो कुछ भी पढ़ें, उसका ढंग से रिविजन जरूर करें।

लखनऊ में रहकर परीक्षा की तैयारी करने वाले अमित मूल रूप से लखीमपुर के हैं। उनके पिता बिजनेसमैन हैं और मां गृहणी। वे कहते हैं, ‘सीएमए में इंस्टीटयूट द्वारा बनाए गए मॉडयूल को ढंग से पढ़ें। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करके अपनी तैयारी को लगातार परखते रहें। कभी भी असफल होने पर घबराकर तैयारी करना न छोड़ें बल्कि आप उससे सबक लें और जो कुछ कमियां हैं, उन्हें दूर करने की निरंतर कोशिश में जुटे रहें। हमेशा अपना लक्ष्य स्पष्ट निर्धारित करें। आगे अमित की सलाह है कि आप इंटरमीडिएट में ही तय कर लें कि आपको आगे क्या बनना है। फिर उसी के अनुसार अपनी तैयारी करते रहें। स्वयं अमित ने एमबीए भी किया है। वे बताते हैं कि वे सरकारी नौकरी करेंगे क्योंकि इसमें काम करने की चुनौती ज्यादा है और आप लोगों का कल्याण भी कर सकते हैं।

खेल व मनोरंजन भी जरूरी

अमित कहते हैं, ‘लंबा-चौड़ा टाइम टेबल बनाने के बजाए उसे ऐसा बनाएं, जिसका पालन भी किया जा सके। दिन भर में कम से कम छह घंटे पढ़ाई करें। पढ़ाई के साथ-साथ खेल व मनोरंजन को भी समय जरूर दें। जो कुछ पढ़ें, उसे खुद की परीक्षा लेकर परखें जरूर। टाइम मैनेजमेंट का बहुत महत्व होता है क्योंकि परीक्षा में आपको एक निर्धारित समय में अपनी पूरे साल की पढ़ाई का इम्तिहान देना होता है।

समझकर पढ़ने पर हो जोर

भावी परीक्षार्थियों को अमित की सलाह है कि कभी भी रटने की कोशिश न करें, बल्कि समझकर पढ़ने पर जोर दें। विषय के बेसिक सिद्धांत को समझें। आपका कैलकुलेशन ऐसा होना चाहिए कि आपको परीक्षा कक्ष में कम पेन उठाना पड़े। दिमाग में कैलकुलेशन करने की आदत डालें ताकि जहां पर जोड़-घटाना हो, उसके लिए आपको समय न खर्च करना पड़े।

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