सूचना विज्ञान और लाइब्रेरी में कैरियर

कैरियर की हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है और कैरियर का चुनाव हमारे जीवन के सर्वाध्कि कठिन फैसलों में से एक है। इससे हमारे भविष्य की दिशा तय होती है तथा हमारी जीवन शैली निर्धारित होती है। विकल्पों की विविध्ता की वजह से कैरियर को चुनना आज कोई आसान फैसला नहीं है। ऐसा अनुमान है कि हर वर्ष लाखों शिक्षित रोजगार चाहने वाले व्यक्ति स्कूलों और कॉलेजों से बाहर निकलते हैं।

अपर्याप्त ज्ञान और अवास्तविक व्यावसायिक आकांक्षाओं के कारण इनमें से ब़डी संख्या में परंपरागत कैरियर, जैसे कि सिविल सेवाएं, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, शिक्षा, रक्षा सेवाओं आदि की तरफ दौ़डते हैं, जहां पर उनके लिए सीमित विकल्प होते हैं। उन व्यक्तियों के लिए हजारों की संख्या में रोजगार के विकल्प मौजूद हैं जो अपनी अभिरुचि तथा क्षमताओं से अवगत हैं तथा सही सूचनाएं उपलब्ध कराते हैं। पुस्तकालयाध्यक्ष के रूप में कैरियर का चुनाव पुस्तकालयाध्यक्ष का मूल उद्देश्य ज्ञान का विस्तार करना है। पुस्तकालयों को अब विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण संस्थानों के रूप में मान्यता प्राप्त है।

लोकतंत्र के व्यापक फैलाव, शिक्षा के विस्तार, अनुसंधन गतिविधियों के तीव्रीकरण तथा रिकार्डिड ज्ञान के उत्पादन में त्वरित वृद्धि ने पुस्तकालयों के विस्तार और उनकी सेवाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान किया है। शिक्षण संस्थानों की संख्या में वृद्धि से पुस्तकालयों की आवश्यकता तथा महत्व में भी वृद्धि हुई है। अत: पुस्तकालयाध्यक्ष का कार्य एक उभरता क्षेत्रा है जिसने ज्ञान की दुनिया में अब अलग विषय-क्षेत्र के रूप में स्थान अर्जित कर लिया है। इन पुस्तकालयों के प्रबंध्न के लिए अच्छी अकादमिक और व्यावसायिक योग्यताएं रखने वाले व्यक्तियों की आवश्यकता होती है।

जो व्यक्ति पुस्तकालय के कैरियर में प्रवेश करन के इच्छुक हैं उनके पास आवश्यक अकादमिक तथा व्यावसायिक योग्यताएं होती हैं जिससे वे पुस्तकालयाध्यक्ष के रूप में सपफलतापूर्वक कार्य करने में सक्षम हो सकें। पुस्तकालयों द्वारा प्रदत्त सेवाओं को अब वर्तमान में उसकी सूचना सेवाओं की भूमिका के रूप में परंपरागत प्राचीन पुस्तकालय कार्यों र्से मिश्रित करते हुए पुस्तकालय और सूचना सेवाएं” के नाम से पुकारा जाता है।

कम्प्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी ने भी सूचना सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना शुरू कर दिया है। इस विषय क्षेत्रा से दो अन्य शब्द, जैसे कि डॉक्यूमेंटेशन तथा सूचना भण्डारण और सुधर” भी जु़ड गए हैं। अत: पुस्तकालयों के अलावा अब प्रलेखन केंद्र और सूचना केंद्र भी काम कर रहे हैं। विभिन्न नामों का प्रयोग होने के बावजूद इस विषय क्षेत्रा में जरूरतमंदों के लिए सूचना सेवाएं उपलब्ध होती हैं।

शैक्षणिक अवसर परम्परागत पाठ्यक्रम-पुस्तकालय और सूचना विज्ञान मात्रा एक अकादमिक विषय-क्षेत्र नहीं है। यह एक व्यावसायिक पाठ्यक्रम है जिसमें व्यावहारिक, प्रेक्षण तथा प्रायोगिक अध्ययन शामिल हैं। इस विषय-क्षेत्रा में शिक्षा और प्रशिक्षण भारत में कई स्तरों पर उपलब्ध है। विश्वविद्यालयों द्वारा संचालित पुस्तकालय विज्ञान में औपचारिक शिक्षा की शुरुआत छह दशक से ज्यादा पुरानी नहीं है।

इससे पूर्व यह प्रशिक्षण विभिन्न राज्यों में पुस्तकालयाध्यक्षों की एसोसिएशन द्वारा संचालित किए जाते थे। सामान्यत: ये छ: माह की अवधि का होता है जिसके तहत प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाते हैं। विश्वविद्यालयों द्वारा शुरू में एक वर्ष की अवधि के डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए गए जिन्हें बाद में अतिरिक्त पाठ्यक्रम जो़डते हुए डिग्री स्तर का कर दिया गया। कई संस्थानों द्वारा अब भी प्रमाण-पत्रा पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। कई बहुतकनीकी संस्थान भी डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करते हैं। एक वर्ष की अवधि के डिग्री पाठ्यक्रम बीएलआईएससी हेतु किसी भी विषय क्षेत्र में स्नातक योग्यताधरी व्यक्ति पात्र हैं।

बीएलआईएससी डिग्री धारक व्यक्ति एक वर्ष की अवधि के मास्टर डिग्री पाठ्यक्रम एमएलआईएससी का अध्ययन कर सकते हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पाठ्यक्रम मॉडल 2001 की सिफारिश पर कई विश्वविद्यालयों ने अब दो वर्षीय एकीकृत पाठ्यक्रम शुरू किए हैं जिनके तहत स्नातक के उपरांत मास्टर डिग्री पाठ्यक्रम का अध्ययन कराया जाता है। एम.फिल पाठ्यक्रम की अवधि एक वर्ष है जबकि पीएच.डी में तीन या पांच वर्ष तक लग जाते हैं।

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