फॉरेंसिक अकाउंटिंग में बनाए करियर

आज आईटी के युग में अक्सर साइबर अपराध की घटनाएं सामने आती रहती हैं। देश में आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सत्यम में हुए बड़े वित्तीय घोटाले का मामला हो या फिर आए दिन सामने आने वाले आर्थिक साइबर अपराधों, मनी लॉन्डिंरग यानी धनशोधन, बीमा, बैंकिंग और निवेश से संबंधित घोटालों आदि के खुलासे की बात, इनकी प्रभावी जांच के लिए फॉरेंसिक अकाउंटिंग की जरूरत होती है। बढ़ते आर्थिक अपराधों के इस दौर में फॉरेंसिक अकाउंटिंग के पेशेवरों का महत्व और उनकी मांग काफी बढ़ गई है। इस कारण इसे करियर बनाने के हिसाब रोजगार का एक अच्छा विकल्प माना जा सकता है।

◆ क्या है फॉरेंसिक अकाउंटिंग

यह अकाउंटिंग की ही एक शाखा है, जिसमें कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए अकाउंटिंग के सिद्धांतों के जरिए ऑडििंटग और जांच-पड़ताल की जाती है। यह काम करने वाले पेशेवरों को फॉरेंसिक अकाउंटेंट कहा जाता है। वह अनुभवी ऑडिटर होते हैं और वित्तीय घपलों का पता लगाने के लिए किसी व्यावसायिक संस्थान (कंपनी, फर्म) के खातों (अकाउंट्स) पर निगरानी रखने का कार्य करते हैं। फॉरेंसिक अकाउंटिंग के लिए सबसे जरूरी होती है अकाउंटिंग की अच्छी जानकारी। इसके बाद ऑडििंटग, जोखिम का आंकलन और घोटालों की पहचान करना आदि की व्यावहारिक समझ को इस पेशे में जरूरी होती है।

इसमें अकाउंटिंग, ऑडििंटग और खोजबीन की दक्षता से आर्थिक घोटालों से संबंधित साक्ष्यों का विश्लोषण करके उनका अर्थ निकालना होता है। किसी मामले की अदालती कार्यवाही में वह बतौर विशेषज्ञ गवाह के रूप में भी योगदान दे सकते हैं। किसी कानूनी विवाद में लिप्त लोगों या फर्मों के मामले में फॉरेंसिक अकाउंटेंट की मुख्य भूमिका संबंधित वित्तीय रिकार्डों (दस्तावेज) की जांच और उनका विश्लोषण करना होता है।

इस कार्य के दौरान वह उन सबूतों को भी जुटाते हैं, जो जांच एजेंसियों को कानूनी प्रक्रिया में सहायता करते हैं। अपने पेशेवर जीवन में फॉरेंसिक अकाउंटेंट को अकाउंटेंट, जासूस और वैधानिक विशेषज्ञ जैसी कई भूमिकाएं निभानी होती हैं। वह संदिग्ध लगने वाले वित्तीय दस्तावेजों की तलाश में रहते हैं, ताकि वह उन अपराधों का पर्दाफाश कर सकें, जिसमें कोई एक व्यक्ति या छोटे-बड़े व्यापारिक समूह शामिल हैं।

◆ महत्वपूर्ण कार्य

– वित्तीय साक्ष्यों की जांच और उनका विश्लोषण करना।

– साक्ष्यों (वित्तीय) की प्रस्तुति और उनके विश्लोषण में मदद के लिए कंप्यूटर आधारित एप्लिकेशन तैयार करना।

– जांच में मिलने वाले तथ्यों को रिपोर्ट और दस्तावेजों के संग्रह के रूप में प्रस्तुत करना।

– अदालत की कार्यवाही में मदद करना यानी न्यायालय में विशेषज्ञ के रूप में गवाही देना और सबूतों को मजबूत करने के लिए दृश्यात्मक सामग्री उपलब्ध कराना।

◆ जरूरी हैं फॉरेंसिक अकाउंटेंट

सभी बड़ी अकाउंटिंग फर्मों में फॉरेंसिक अकाउंटेंट की जरूरत होती है। इन फर्मों में उनका कार्य कंपनियों के बीच होने वाले गठजोड़ों और अधिग्रहण समझौतों की जांच करना, विशेष ऑडिट करना, आर्थिक अपराधों तथा टैक्स की गड़बड़ी से संबंधित मामलों की जांच करना होता है। तलाक, व्यापार और दुर्घटनाओं से संबंधित क्लेम के मामलों की जांच में भी फॉरेंसिक अकाउंटेंट की जरूरत होती है। वह अपनी इच्छा के अनुसार नौकरी के लिए सरकारी या निजी क्षेत्र की कंपनियों का रुख कर सकते हैं।

◆ रोजगार उपलब्ध कराने वाली संस्थाएं

पब्लिक अकाउंटिंग फर्म, प्राइवेट कॉर्पोरेशंस, बैंक, पुलिस एजेंसियां, सरकारी एजेंसियां, इंश्योरेंस कंपनियां, लॉ फर्म।

◆ आवश्यक दक्षता

गहन विश्लोषणात्मक कौशल, जांच-पड़ताल का हुनर, तथ्यों को बारीकी से जानने की इच्छा, किसी दबाव में न आते हुए काम को पूरा करने की दृढ़ता, अपने काम के प्रति पूर्ण निष्ठा, जिज्ञासा, रचनात्मक सोच।

◆ शैक्षणिक योग्यता

किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से बैचलर डिग्री प्राप्त हो, दो से चार साल का पेशेवर अनुभव हो, इंडिया फॉरेंसिक द्वारा आयोजित सीएफएपी परीक्षा न्यूनतम 75 फीसदी अंकों के साथ पास हो (सीपीए एक प्रोफेशनल डिग्री है, जो भारत में सीए की तरह है, इसे अमेरिकन इंस्टीटयूट ऑफ सर्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट्स जारी करता है।)

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