सर्दियां में जोड़ों के दर्द एवं वात विकार का खतरा

सर्दी ऋतु में जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ जाती है। हड्डियों से जुड़ी समस्याओं के उभरने की संभावना अधिक होती है। साल का यह समय उनके लिए दबे हुए दर्द को उभारने वाला होता है। कंसल्टेंट ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन के अनुसार, इस मौसम में रक्त अच्छी तरह से संचरित नहीं हो पाता है और शरीर के अगले भागों में रक्त का बहाव बहुत कम हो जाता है।

बैरोमीटर के दबाव में बदलाव होने से जोड़ों में परेशानी या सूजन हो सकती है जो बदलते मौसम के अनुसार खुद को ढालने के लिए हमेशा तैयार नहीं होता है। यही कारण है कि सर्दी के मौसम में यहां तक कि एक छोटी सी चोट या सिर्फ एक छोटा सा घाव भी तेज दर्द पैदा कर सकता है। सर्दियों में शरीर हार्ट के पास के ब्लड को गर्म रखना चाहता है और इसके कारण संधियों मे रक्त को संचार कम हो जाता है। इसके कारण जोड़ों में अधिक दर्द एवं कड़ापन होता है। सर्दियों में उन लोगों को जोड़ों में अधिक दर्द होता है जिन्हें पहले कभी आर्थोपेडिक संबंधी चोट लगी हो, फ्रैक्चर अथवा मोच की समस्या हुई हो या जिनकी हड्डियों को जोड़ा गया हो। जोड़ों के तेज दर्द से कैसे निजात पाएं।

अर्थोपेडिक डॉक्टरों के मुताबिक इस मौसम में जरूरी है रोजाना एक्सरसाइज करना। व्यायाम मसल्स को स्ट्रॉग बनाने के साथ हेल्दी बनाता है। साथ ही, दर्द को खत्म करता है। सर्दियों में व्यायाम एवं शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण सर्दियों में जकड़न और बढ़ती है। अगर आप अपनी डाइट में विटमिन कम ले रहे हैं, तो जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या आ सकती है। इससे बचने के लिए अपनी डाइट में अदरक, हल्दी, संतरा, पत्तागोभी, गाजर, पालक और टमाटर जैसे विटमिन युक्त फलों और सब्जियों को शामिल करें। खूब पानी पीना चाहिए , जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज एक चिकना कोमल ऊतक होता है जो र्घााण को कम करने के लिए जिम्मेदार होता है। चूंकि इसकी सतह चिकनी होती है, इसलिए इसे नम रहने की जरूरत होती है।

सुबह की सैर करें और पर्याप्त मात्रा में विटमिन डी लें। धूप में भी कुछ समय बिताना चाहिए। एरोबिक्स, स्वीिंमग और धीमी स्पीड से साइकििंलग करना भी फायदेमंद रहेगा। ये जोड़ों की जकड़न को कम कर रक्त संचार बढ़ा देता है। दूसरी ओर, सूजन को कम करने के लिए आइस पैक का उपयोग करना चाहिए। दर्द तेज है, तो फिजियोथेरेपी कराएं। इसके अलावा, हीिंटग पैड और कंबल का भी उपयोग कर सकते हैं।

फिजियोथेरेपी और कभी-कभी शरीर की मालिश से भी मांसपेशियों और तंत्रिकाओं को मजबूत और लचीला रखने में मदद मिलती है। जोड़ों को सहायता देने के लिए ब्रेसिज पहनना चाहिए। ये आपको दर्द में आराम देंगे। जोड़ों और मांसपेशियों में मामूली दर्द भी हो, तो किसी आर्थोपेडिक विशोाज्ञ से सलाह लेना चाहिए।

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