कैशलेस लेन-देन से आयेगी नौकरियों की बहार

नोटबंदी के बाद केन्द्र सरकार कैशलेस यानी डिजिटल लेन देन की मुहिम शुरू की है। डिजिटल भुगतान के अभियान के दौर में सरकार देश में एक साल के भीतर दो लाख 50 हजार से भी ज्यादा रोजगार सृजित होने का अनुमान लगा रही है।

केंद्र और राज्य के सरकारी कार्यालयों, बैंकों, निजी कंपनियों तथा डिजिटल सेवा क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर तकनीकी पेशेवरों की जरूरत बढ़ गई हैं। साल 2017 के अंत तक इसके नतीजे सामने आएंगे जिन्हें डिजिटल इंडिया अभियान में एक एकत्र कर सार्वजनिक किया जा सकता है। केंद्र और राज्य सरकार के महकमों में डिजिटल प्रशिक्षितों, सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों, प्रोग्रामर्स, बायो-मैट्रिक और साइबर सुरक्षा के तकनीकी जानकारों की मांग बढ़ने लगी है। सरकार की चिंता सबसे ज्यादा प्रादेशिक भाषाओं में प्रशिक्षकों को तैयार करने की है।

नीति आयोग द्वारा चलाए जा रहे डिजिधन अभियान में ऐसे कई पहलू सामने आएं है। सरकार इन सभी पहलुओं पर विचार कर रही है और जल्द राज्यों से भी इसे साझा किया जाएगा। वाणिज्य मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक इस साल के अंत तक देश में ढाई करोड़ से भी ज्यादा रोजगार डिजिटल क्षेत्र में सृजित होंगे। इस अनुमान में वह नौकरियां नहीं शामिल हैं जो जरूरतें हर साल इस क्षेत्र में शामिल होने वाले 27 लाख से भी ज्यादा पेशेवर पूरा करते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा पांच राज्यों में चुनाव के बाद रोजगार सृजन की आधिकारिक घोषणा डिजिटल इंडिया अभियान कार्यक्रम में की जाएगी।

  • पौने दो करोड़ प्रशिक्षितों की जरूरत

डिजिटल इंडिया अभियान में सूचना प्रौद्योगिकी और इससे जुड़े इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में 2019 तक 10 लाख से भी ज्यादा नौकरियां पैदा होने की उम्मीद सरकार ने जताई थी। एक लाख करोड़ के इस अभियान में ढाई लाख गांवों तक ब्राडबैंड और यूनिवर्सल फोन कनेक्टिविटी, चार लाख सार्वजनिक इंटरनेट क्षेत्र, ढाई लाख वाई-फाई स्कूल तैयार करना तथा सभी विश्विद्यालयों को इंटरनेट से लैस करना शामिल है।

सरकार ने इसमें प्रत्यक्ष तौर पर पौने दो करोड़ सूचना प्रौद्योगिकी प्रशिक्षित, दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक्स रोजगार का अनुमान लगाया है जबकि अप्रत्यक्ष तौर पर इस क्षेत्र में तकनीकी व गैर-तकनीकी स्तर पर काम करने वाले साढ़े आठ करोड़ लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद जताई है। नोटबंदी के बाद सभी सरकारी विभागों को इस अभियान के तहत तकनीकी सहायता मुहैया करायी जा रही है। नीति आयोग की ओर से 100 दिनों का अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

  • रोजगार सृजन का सबसे बड़ा क्षेत्र

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के मुताबिक डिजिटल लेनदेन में गत डेढ़ माह में आई गति यह स्पष्ट करती है कि सभी सरकारी और निजी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होने वाला है। इस जरूरत को प्रशिक्षित लोग ही पूरा कर सकते हैं।

यह सबसे ज्यादा नौकरियां देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र होगा और यही भविाय है। उन्होंने कि सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स पेशेवरों के लिए सभी क्षेत्रों में रोजगार के रास्ते खुलने लगे हैं। हालांकि सीईओ ने कोई भी आंकड़ा देने से इंकार करते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान के तहत सरकार पहले ही 2019 तक इस क्षेत्र में दस लाख से भी ज्यादा रोजगार सृजित होने का अनुमान लगा चुकी है।

जाने-माने अर्थशास्त्री और नीति आयोग के सदस्य बिवेक देवराय का कहना है कि डिजिटल क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भविाय में रोजगार देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र बनकर उभरेगा। भारत इस ओर तेजी से बढ़ रहा है और उसकी जरूरतें ज्यादा हैं। इसलिए यहां सबसे ज्यादा रोजगार का सृजन होगा। लेकिन कुछ नौकरियां कम भी होंगी जैसे डिजिटल लेनदेन बढ़ने पर बैंक में क्लर्क कम रखे जाएंगे। इसी तरह, अन्य क्षेत्रों में भी गैर-प्रशिक्षित लोग प्रभावित होंगे। लेकिन नौकरियां बड़ी तादाद में बढ़ेंगी जबकि घटेंगी मामूली स्तर पर। ये हैं चुनौतियां डिजिटल क्षेत्र में वीजा द्वारा अक्टूबर में कराए गए एक सर्वेक्षण की माने तो सरकारी और निजी क्षेत्र में २0११ से २0१५ के दौरान १़३0 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है।

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