दिमाग के लिए भी बेहद घातक वायु प्रदूषण

अभी तक वायु प्रदूषण को दिल एवं फेफड़े से संबंधित बीमारियों के लिए जिम्मेंदार माना जाता था। एक ताजा शोध में दावा किया गया है कि वायु प्रदूषण दिमाग के लिए भी बेहद घातक साबित हो सकता है। यह दिमाग की क्षमता पर असर डालता है साथ ही उससे जुड़ी कई बीमारियों की वजह भी हो सकता है। ब्रिटेन की लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी के एक विशेष दल के नए शोध में दावा किया गया है कि ये दिमाग से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहा है।

लैंकेस्टर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और शोधकर्ता दल की सदस्य बारबरा माहेर ने बताया कि उन्हें रिसर्च के दौरान दिमाग के नमूने में वायु प्रदूषकों के लाखों कण मिले। उनके मुताबिक एक मिलीग्राम दिमाग के ऊतक में लाखों चुम्बकीय प्रदूषक कण मिले हैं जिससे दिमाग को खतरा हो सकता है। इससे दिमाग के क्षतिग्रस्त होने की प्रबल संभावना है। माहेर के मुताबिक श्वांस के माध्यम से शरीर में पहुंचने वाले प्रदूषण के कणों का बड़ा भाग तो श्वास की नली में जाता है लेकिन इसका एक छोटा हिस्सा स्नायु तंत्र से होते हुए दिमाग में भी पहुंचता है।

उन्होंने बताया कि शोध के दौरान पता चला कि मैगनेटिक प्रदूषक कण दिमाग में पहुंचने वाली आवाजों और संकेतों को रोक सकते हैं, जिससे अल्जाइमर जैसी बीमारी हो सकती है। हालांकि अल्जाइमर के साथ इसके जुड़े होने की पुष्टि अभी पूरी तरह से नहीं हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक साल 2012 में दुनिया भर में हुई हर आठ में से एक मौत का कारण वायु प्रदूषण ही था। खाना बनाने के दौरान चूल्हे और गाड़ी से निकलने वाला धुआं करीब 70 लाख लोगों की मौत का कारण बना। विश्व स्वास्थ्य संगठन में सार्वजनिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य की प्रमुख मारिया नीरा के अनुसार घर के भीतर और बाहर वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या है और यह विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों को प्रभावित कर रहा है।

प्रदूषण के कारण जो घातक बीमारियां होती हैं, उनमें हृदय संबंधी रोग, फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां और फेफड़ों का कैंसर शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि दक्षिण एशिया में भारत और इंडोनेशिया सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में है। वहीं पश्चिमी प्रशांत में चीन से लेकर दक्षिण कोरिया और जापान से लेकर फिलीपींस शामिल है। इन देशों में कुल 59 लाख लोगों की मौत प्रदूषण के कारण जुड़ी बीमारियों से हुई है। घर के अंदर मुख्य रूप से कोयला, लकड़ी और जैव इंधन स्टोव से खाना बनाने और अन्य कारणों से हुए प्रदूषण से 43 लाख लोगों की मौत हुई है।

घर के बाहर होने वाले प्रदूषण में कोयले द्वारा ताप और डीजल इंजन शामिल है। पिछली बार 2008 में जब डब्ल्यूएचओ ने वायु प्रदूषण से मौत के अनुमान की रिपोर्ट जारी की थी उसमें घर के बाहर होने वाले प्रदूषण के कारण 13 लाख लोगों की मौत और घर के अंदर प्रदूषण के कारण 19 लाख लोगों की मौत का जिक्र था।

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