नेचुरोपैथी में बनाएं करियर

चिकित्सा विज्ञान में नेचुरोपैथी को कुदरती इलाज या प्राकृतिक चिकित्सा के नाम से जाना जाता है। मेडिकल टर्म के रूप में इसे आयुर्वेद की श्रेणी में रखा गया है। अंग्रेजी दवाओं के जाल से ऊब चुके लोगों को चिकित्सा की यह पद्धति सदियों से राह दिखाती रही है।

देश की यह पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली आज भी जगह-जगह अपनी पैठ बनाए हुए है। इसे जानने और इसके जरिए समाज को सुखी और स्वस्थ बनाने के लिए विभिन्न संस्थान नेचुरोपैथी का बाकायदा कोर्स भी चला रहे हैं। आज ऐसे युवाओं की कमी नहीं जो इस प्रणाली में रुचि और लगन दिखा रहे हैं।

यह चिकित्सा पद्धति ऐसे लोगों को बतौर चिकित्सक जीने की राह दिखा रही है। नेचुरोपैथी का मतलब सारी सृष्टि पंच भूतात्मक है। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश जैसे पांच तत्व इसी के अंतर्गत हैं। मनुष्य की काया इसी से बनी है। इस काया में ही आत्मा का निवास है। मनुष्य को जीवन मिलने पर उसमें प्राण का संचार होता है। मनुष्य ऐसी प्रकृति के बीच खुद को कैसे स्वस्थ रखे, उसकी जीवन शैली कैसी हो ताकि रोग उसे अपना शिकार नहीं बनाये, इसका ज्ञान नेचुरोपैथी आम लोगों को बखूबी देता है।

अंतरराष्ट्रीय नेचुरोपैथी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सीबी सिंह कहते हैं कि इस पद्धति में खानपान की शैली और हावभाव जानकर किसी व्यक्ति की बीमारी का इलाज किया जाता है। इलाज के तहत नेचुरोपैथी के चिकित्सक या प्रैक्टिशनर उचित खानपान का चार्ट तैयार करते हैं। उसे हर्बल से बनी दवाइयां देते हैं। इसमें खास बात यह कि इसकी दवाओं में केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसलिए यह लोगों के लिए हानिकारक भी नहीं है। उदाहरण के तौर पर शरीर में पैदा होनेवाले दोाा या विकार को वात, पित्त और कफ के रूप पहचानकर उसका उचित इलाज किया जाता है।

शरीर के गुणधर्म को पहचानते हुए किसी व्यक्ति का उपचार किया जाता है। संस्थान नेचुरोपैथी से जुड़े कोर्स की पढ़ाई आज भारत में १२वीं के बाद रेगुलर शिक्षण संस्थानों और कॉलेजों में जगह-जगह हो रही है। सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन योगा एंड नेचुरोपैथी, जनकपुरी, नई दिल्ली डिप्लोमा का कोर्स कराता है। पुणे स्थित बापू भवन में नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ नेचुरोपैथी अपने यहां ट्रीटमेंट एंड ट्रेनिंग कोर्स चलाता है। गांधी नेचर क्योर कॉलेज, हैदराबाद गोरखपुर स्थित आरोग्य मंदिर भी मास्टर और डॉक्टर की डिग्री मुहैया कराता है।

देश में करीब 12 डिग्री कॉलेजों में इसकी पढ़ाई स्नातक तक होती है। इसके तहत वे बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन और सर्जरी की डिग्री देते हैं। कोर्स की अवधि करीब पांच र्वाा होती है। ऐसे संस्थानों में दिल्ली विश्वविद्यालय का तिबिया कॉलेज प्रमुख है। अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद, दिल्ली भी नेचुरोपैथी में डिप्लोमा कोर्स कराता है।

यह पार्ट टाइम के रूप में है। इसमें ट्रेनिंग के बाद छात्रों को बतौर ट्रेनिंग इंटर्नशिप पर भी भेजा जाता है। कई संस्थान नेचुरोपैथी में स्नातक डिग्री भी संचालित करते हैं। अवसर कहां इसे करने के बाद छात्र चाहे तो स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस कर सकता है तथा क्लीनिक खोल सकता है। इसके अलावा, देश के सरकारी और निजी अस्पतालों में भी जगह-जगह इलाज की इस पद्धति के लिए अलग से सेंटर खोले गए हैं। यहां भी काम करने का अवसर है। विदेशों में इसे अब लोकप्रिय बनाया जा रहा है । अंग्रेजी दवा पद्धति से परेशान लोग इधर खिंचे चले आ रहे हैं।

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