अपनी बॉलकनी में पौधे लगाएं?

चूंकि आज तेजी से फैलते फ्लैट सिस्टम ज्यादा चलन में है, इस वजह से बागवानी के लिए हमें उचित और पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती है। ऐसे में हमारे पास बागवानी करने के ऑप्शन में सिर्फ बॉलकनी ही एक जगह बचती है।

अगर आपको बागवानी का शौक है, तो आप अपनी बॉलकनी में करोटन और ग्लेडिया के पौधे लगा सकते हैं। माना जाता है कि करोटन के पौधे शुद्ध वायु प्रदान करने के साथ-साथ आयु बढ़ाने में भी लाभदायक होते हैं। बॉलकनी में बागवानी करने के लिए बोनसाई तकनीक है सबसे अच्छी हम अगर फ्लैटों में रहते हैं तो बागवानी के लिए जगह ही कहां मिल पाती है। ऐसे में लोग चाहते हैं कुछ ऐसे पौधे, जो कम जगह घेरने के साथ-साथ घर में ही हरियाली लाएं! इस तकनीक को बोनसाई कहते हैं।

क्या है बोनसाई तकनीक?

बोनसाई छोटे पौधे बनाने की बहुत पुरानी तकनीक है। यह तकनीक सबसे पहले जापान में शुरू की गई थी। इस तकनीक में पौधों को एक छोटे-से पॉट यानी गमले में लगाया जाता है। इस तकनीक में विभिन्न प्रकार के पौधों जैसे आम, नींबू, संतरा और अनार इत्यादि को एक विशेष तकनीक की मदद से छोटा ही रखा जाता है, यानी इन पौधों को बड़ा नहीं होने दिया जाता। लेकिन इस छोटे पॉट यानी गमले में भी इन पौधों का स्वभाव वही रहता है। इस तरह इस छोटे गमले में भी यह पौधा बड़े पेड़ की तरह ही फल और फूल देता है।

बरतें थोड़ी सावधानियां

-खाद, मिट्टी, बालू की मात्र को संतुलित हो।

-पौधे को कीटाणुओं से बचाने के लिए उसमें कीटनाशक दवाओं जैसे- मैलाथीन और गैमक्सीन इत्यादि का पौधों की जड़ों में नियमित रूप से छिड़काव करवाएं।

-मानसून के दौरान पौधों को खुले आसमान के नीचे रखें ताकि उनकी जड़ें मजबूत हो सकें। समय-समय पर इन पौधों के बेकार पत्तों की कटाई करवाते रहें।

क्या है यह मॉस खाद?

यह एक प्रकार की खाद होती है जो बालू रेत, मिट्टी और खाद, तीनों के मिश्रण से बनाई जाती है। मॉनसून के समय यह खाद पौधों के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है और यह खाद पौधे की जड़ों को मजबूत करने में लाभदायक होती है जिसकी वजह से आपके पौधे हरे-भरे और सुंदर नजर आएंगे! इससे पौधों की उम्र भी लंबी होती है।

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