जेनेटिक स्पेशलिस्ट की बढ़ रही है डिमांड

जिस तरह क्लोन बनाने को लेकर काम हो रहा है, नई दवाइयां तैयार की जा रही हैं, ऐसे में जेनेटिक से जुड़े विशेषज्ञों की मांग बढ़ती जा रही है। इससे संबंधित बीटेक/बीएससी डिग्री अभी देश के किसी भी संस्थान में नहीं शुरू है लेकिन पांच वर्षीय ड्यूएल डिग्री एमटेक करायी जा रही है। जेनेटिक इंजीनियिंरग से लैस कई उत्पाद आज बाजार में उपलब्ध हैं। यह विज्ञान की अत्याधुनिक ब्रांच है, जिसमें सजीव प्राणियों के डीएनए कोड में मौजूद जेनेटिक को अत्याधुनिक तकनीक के जरिए परिवर्तित किया जाता है।

जेनेटिक तकनीक द्वारा ही रोग प्रतिरोधक फसलें और सूखे में पैदा हो सकने वाली फसलों का उत्पादन किया जाता है। बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में जेनेटिक इंजीनियिंरग का इस्तेमाल बृहद पैमाने पर होता है। छात्र ने 12वीं लेवल पर फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथमेटिक्स और बायोलॉजी का अध्ययन किया है, उनके लिए जेनेटिक इंजीनियिंरग का क्षेत्र बेहतरीन विकल्प है। वर्तमान दौर में जेनेटिक इंजीनियिंरग का स्कोप काफी बढ़ा है। यदि छात्र ने 12वीं लेवल पर फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथमेटिक्स और बायोलॉजी का अध्ययन किया है। उनके लिए जेनेटिक इंजीनियिंरग का क्षेत्र बेहतरीन विकल्प है, लेकिन इस फील्ड में आगे तभी बढ़ा जा सकता है जब आप विषय को अच्छी तरह समझ सकें। तभी रोजगार भी मिल सकता है।

पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर के काफी कम संस्थान हैं जहां जेनेटिक की पढ़ाई होती है लेकिन अधिकतर संस्थानों में जेनेटिक इंजीनियिंरग की पढ़ाई ग्रेजुएशन स्तर पर होती है और बीटेक संचालित किया जाता है। इसके तहत जेनेटिक मेकअप के अलावा विशिष्ट जींस का अध्ययन किया जाता है। जो छात्र जेनेटिक्स या जेनेटिक इंजीनियिंरग का अध्ययन करना चाहते हैं उन्हें गहरे तौर पर 12वीं स्तर पर फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथमेटिक्स और बायोलॉजी का अध्ययन करना चाहिए। जेनेटिक्स बायोटेक्नोलॉजी के व्यापक क्षेत्र का हिस्सा है।

बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री पूरी तरह जेनेटिक्स पर आधारित है क्योंकि इसी के जरिए फार्मास्यूटिकल्स के प्रोडक्ट मसलन, इंसुलिन या दूसरी दवाइयां बनती हैं। मेडिकल फील्ड में जेनेटिक्स का फोकस बीमारियों, बीमारियों के मॉल्यूक्युलर आधार और इससे बचाव पर होता है। औद्योगिक उत्पादन में बायोटेक्नोलॉजी अहम भूमिका निभाता है खासकर बायोकेमिकल इंजीनियिंरग के क्षेत्र में। इसके दायरे में बायोलॉजी की तमाम शाखाएं मसलन माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री, जेनेटिक्स और मॉलिकुलर बायोलॉजी के अलावा केमिकल और सिस्टम इंजीनियिंरग आते हैं।

अधिकतर विद्यालय जेनेटिक्स में अलग कोर्स संचालित नहीं करते बल्कि बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमेस्ट्री जैसे स्ट्रीम के तहत सब्सिडियरी विषय के तौर पर संचालित करते हैं। बीटेक लेवल पर जेनेटिक इंजीनियिंरग के कोर्स काफी कम ही जगह संचालित किए जाते हैं। यही कारण है कि अधिकतर छात्र बायोटेक्नोलॉजी या बॉयोकेमिकल इंजीनियिंरग में बीटेक कोर्स में एडमिशन लेते हैं। दूसरा ऑप्शन यह है कि जेनेटिक्स, बॉयोलॉजिकल साइंस, लाइफ साइंसेज या बायोटेक्नोलॉजी में बीएससी की डिग्री हासिल करते हैं और तब जेनेटिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन।

केरियर- यदि जेनेटिक से संबंधित डिग्री लेने के बाद आप वैज्ञानिक बनना चाहते हैं तो आपको डॉक्टोरल डिग्री लेनी होगी। रिसर्च और डेवलपमेंट ऑग्रेनाइजेशन, फार्मास्यूटिकल कंपनियों, बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज के अलावा एकेडमिक इंस्टीट्यूशन आदि में संभावनाएं हैं।

संस्थान- किसी भी आईआईटी में जेनेटिक इंजीनियिंरग में बीटेक का कोर्स नहीं हैं। इसके बदले बायोटेक्नोलॉजी और बायोकेमिकल इंजीनियिंरग प्रोग्राम ऑफर करते हैं।

– आईआईटी, चेन्नई में बायोटेक्नोलॉजी में बीटेक और पांच वर्षीय ड्यूएल डिग्री एमटेक प्रोग्राम है।

– आईआईटी खड़गपुर में बायोटेक्नोलॉजी और बायोकेमिकल इंजीनियिंरग में बीटेक और पांच वर्षीय ड्यूएल एमटेक का कोर्स है। आईआईटी गुवाहाटी में बायोटेक्नोलॉजी में बीटेक कोर्स है।

– आईआईटी दिल्ली में बायोके मिकल इंजीनियिंरग और बायोटेक्नोलॉजी में पांच वर्षीय ड्यूएल डिग्री एमटेक कोर्स संचालित किया जाता है। आईआई टी रुड़की में बॉयोटेक्नोलॉ जी में एमटेक कोर्स है।

– पुणे यूनिवर्सिटी में बायोटेक्नोलॉजी में एमएससी और एमटेक प्रोग्राम संचालित किये जाते हैं।

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