ढेरों है एनजीओ मैनेजमेंट में करियर का ऑप्शन

देश-विदेश में बढ़ रहा एनजीओ मैनेजमेंट, ढेरों हैं करियर ऑप्शन

अब वह समय गया, जब सोशल वर्क के क्षेत्र में सिर्फ वही लोग शामिल होते थे, जो अपने संसाधनों और दान-दक्षिणा कर समाज सेवा करना चाहते थे, अब ऐसा नहीं है। हां, इस क्षेत्र में आने के लिए विशिष्टता यही है कि रोजगार का साधन होने के बावजूद समाज हित की भावना सर्वोपरि होनी चाहिए। देखते ही देखते एनजीओ रोजगार की दिशा में एक बेहतर ऑप्शन बन चुका है।

आज एनजीओ मैनेजमेंट के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, इसलिए बड़ी तादाद में यंगस्टर्स इसे नए करियर विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। नॉन गर्वमेंटल ऑर्गेनाइजेशन यानी गैर सरकारी संगठन को किसी मिशन के तहत चलाया जाता है। एनजीओ का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समस्याओं और विकास की गतिविधियों को बढ़ावा देना होता है। इस फील्ड में आप महिला समस्या, बाल विकास, मानवाधिकार, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण, शिक्षा और संस्कृति आदि कार्यक्षेत्र चुन सकते हैं।

खास बातें- इस कोर्स में दाखिला लेने से पहले ध्यान रखें कि आपको सामूहिकता के माहौल में काम करने का अनुभव जरूर होना चाहिए। आपकी कम्युनिकेशन स्किल्स अच्छी होनी चाहिए। स्थानीय भाषा के साथ ही अंग्रेजी भाषा का ज्ञान काम को आसान बना सकता है। इन बातों का ध्यान रखकर इस फील्ड में महारथ हासिल की जा सकती है।

संभावनाएं हैं यहां- इस कोर्स को करने के बाद एनजीओ मैनेजर, प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर, एनजीओ ह्यूमन रिसोर्स, फाइनेंस मैनेजर जैसे कई पदों पर काम किया जा सकता है। इसके अलावा फिक्की, एसओएस विलेज, मिनस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर, एफएआरएम, अमर ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट और प्रयास जैसे एनजीओज में अच्छे सैलरी पैकेज में काम मिल सकात है। इस समय देखा जाए तो एड्स अवेयरनेस प्रोजेक्ट, चाइल्ड अब्यूज प्रिवेंशन कमेटी, स्ट्रीट चिल्ड्रन एजुकेशन, ड्रग रिहेबिलिटेशन सेंटर, ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रम, सेक्स वर्कर फोरम आदि में भी काम के अवसर हैं।

एनजीओ प्रबंधन के कोर्सेस के बाद ऑपरेशनल और एडवोकेसी दोनों तरह के एनजीओ़ज में काम के अवसर हैं। बता दें कि ऑपरेशनल एनजीओ में वित्त प्रबंधन और मीडिया प्रबंधन वालों को काम करना आसान है, जबकि एडवोकेसी का काम भी ऑपरेशनल से कम नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक कामों को प्रेरित करने जैसे कई काम संभालने होते हैं।

प्रमुख संस्थान-

  1. इग्नू, पत्राचार माध्यम द्वारा
  1. दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
  1. जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली
  1. टाटा इंस्टीटयूट ऑफ सोशल साइंस, मुम्बई
  1. कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, हरियाणा
  1. राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर
  1. पंजाब विश्वविद्यालय, पटियाला
  1. काशी विद्यापीठ, वाराणसी
  1. लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ
  1. जेवियर इंस्टीटयूट, ऑफ सोशल साइंसेज, रांची
  1. भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, गुजरात
  1. सेंटर ऑफ सोशल इनिशिएटिव एंड मैनेजमेंट, हैदराबाद
  1. अन्नामलाई विश्वविद्यालय, तमिलनाडु
  1. एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ एनजीओ मैनेजमेंट, नोएडा
  1. ग्रामीण प्रबंधन संस्थान, आणंद

इतनी ही नहीं, इंटरनेट पर कई वेबसाइटों पर हिंदी और अंग्रेजी में विभिन्ना कोर्सेज की जानकारी उपलब्ध है। हिंदी वेबसाइट्स में एक प्रमुख साइट है, ‘द एनजीओ टाइम्स डॉट कॉम। इससे कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं।

यूजी/पीजी कोर्स-

  1. मास्टर ऑफ सोशल वर्क
  1. बैचलर ऑफ सोशल वर्क
  1. डिप्लोमा इन एनजीओ मैनेजमेंट
  1. सर्टिफिकेट कोर्स इन एनजीओ मैनेजमेंट

चयन का आधार- चयन का प्रमुख आधार है संस्थान द्वारा आयोजित होने वाला एंट्रेंस एग्जाम। एंट्रेंस एग्जाम में लिखित परीक्षा, ग्रुप डिस्कशन और पर्सनल इंटरव्यू को शामिल किया जाता है। लिखित परीक्षा का उद्देश्य सामाजिक सेवा के प्रति अभिरुचि को देखना है। कम्युनिकेशन स्किल्स, एनालिटिकल एबिलिटी और लैंग्वेज कॉम्प्रिहेंशन के साथ- साथ समाज के ज्वलंत मुद्दों की अच्छी परख होना भी बेहद जरूरी है। प्रदर्शन के आधार पर प्रवेश के लिए मेरिट बनती है।

क्या कहते हैं आंकड़े?- नए आंकड़ों के मुताबिक देश में वर्तमान में लगभग 14 हजार एनजीओ कार्यरत हैं। इसमें 53 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में, 17 प्रतिशत ह्युमन रिसोर्स डेवलपमेंट में, 10 प्रतिशत सोशल जस्टिस एंपारवमेंट, 6 प्रतिशत हेल्थ केयर एंड फैमिली सेक्टर में और बाकी बचे यूथ और स्पोर्ट्स सेक्टर में कार्यरत हैं।

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