सफलता तक ले जाती हैं ये राहें

हर कोई सफल होना चाहता है। सफलता के लिए कड़ी मेहनत के साथ ही राह भी सही होनी चाहिये। इस रास्ते में किसी भी विचार को कम या छोटा समझने की भूल न करें। निरंतर प्रयास के साथ ही सही रणनीति के जरिये अपनी क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए बनाया गया प्रयास कभी विफल नहीं होता। इसके साथ ही सही रूटीन भी जरूरी है।

सबसे पहले एक छोटी डायरी लीजिए और उस पर रोज़ सुबह 10 आइडियाज लिखिए। शुरूआत में यह कठिन लगेगा क्योंकि आपको लगता है कि सारे के सारे 10 आइडिया दमदार नहीं होंगे पर रूकें नहीं। केवल इसी वजह से दिमाग को सक्रिय करने से न रोकें। यह आपकी नहीं, दिमाग़ की ही रणनीति है ताकि उसको खराब या बेकार करार दिए जाने से डर से आइडिया सोचने से ही रोक दिया जाए।

➧ एक आइडिया बदलेगा जीवन

वहीं अगर आपको लगता है कि 10 नहीं सोच पाएंगे, तो 20 सोचिए। ज्यादा बोझ डालेंगे, तो दिमाग़ कम से कम 10 तो सही सोचेगा ही। रणनीति के तहत आपको आइडिया की केवल एक पंक्ति ही लिखनी है।

उदाहरण के लिए रिचर्ड ब्रैन्सन द स्टूडेंट पत्रिका के मालिक थे। उन्हें किसी एअरलाइन की सेवाएं पसंद नहीं आतीं। एक दिन उन्होंने लिखा वे अपनी एअरलाइन चलाना चाहेंगे। कितना बेमेल-सा विचार लगता था, हवाई उड़ान जैसा। आज वे विश्व की सबसे कामयाब एअरलाइंस में से एक वर्जिन एअरलाइंस के मालिक हैं। एक आइडिये ने उनकी जिंदगी ही बदल दी।

➧ समय सीमा में करें काम

अपने आप को, जीवन और काम को व्यवस्थित कीजिए। समयसीमा में अपने कामों को पूरा कीजिए। यह जीवनशैली का हिस्सा नहीं, जीवनशैली ही होनी चाहिए। अगर कोई आपसे कहे कि आप बहुत व्यस्त रहते हैं, इसलिए आपको फोन करने या आपसे मिलने की इजाज़त मांगने में झिझक हो रही थी, तो समझिए आप समस्या में हैं। इसे सुलझाना ही नहीं, समझना भी ज़रूरी है।

समस्या। बहुत व्यस्त का मतलब सीधा-सा होता है कि आपका समय और उसका नियोजन आपके हाथ में नहीं है। यह अच्छा संकेत कैसे हो सकता है?

वहीं जाने-माने वक्ता डेरेक सिवर्स कहते हैं कि जब मुझे कोई कहता है कि आपके पास समय नहीं होगा, तो मुझे लगता है कि मैं अव्यवस्थित हूं। समय की कमी का मतलब है प्राथमिकताओं की समझ में कमी। मैं किसी को नहीं कहता कि व्यस्त हूं। और अगर व्यस्त कहना पड़े, तो समझ जाऊंगा कि काम के ढंग पर निगाह डालने की जरूरत है।

➧ नियम को बोझ न बनने दें

अगर कोई व्यायाम, अभ्यास या ध्यानादि करते हैं, तो उसके लिए क्या समय भी तय करते हैं? यह सारे काम स्वास्थ्य ही नहीं, आनंद के लिए हैं। इन्हें बांधना ठीक नहीं। तऱीका… योग, ध्यान आदि क्रियाओं को करने के लिए समय बांधा है, तो उससे कम समय ही दें। मान लीजिए, 5 मिनट के लिए ध्यान लगाने को सोचा है, तो चार मिनट में ही उठ जाएं। कभी 3 भी कर लें। मन को आनंदित करने वाली ऐसी साधनाएं जारी रहें, इसके लिए इनको बोझ बनाना ठीक नहीं। 5 मिनट की बंदिश कभी नियम की तरह बोझिल न हो जाए, इसका ख़्याल रखें।

जॉय ऑन डिमांड के लेखक शेड-मेंग की सलाह है कि कोई भी नियम बोझ लगने लगे, आदत की तरह का अहसास देने लगे, तो उससे मन हटने लगता है। तब परिवर्तन की इच्छा होने लगती है। लेकिन आनंद और सेहत के संधान में परिवर्तन कैसे किया जा सकता है?

कभी भी उस वजह पर अपनी असफलता का ठीकरा न फोड़ें, जो दोषी हो ही नहीं सकती। कितनी ही बार हमें प्यास या भूख सता रही होती है और हम चिड़चिड़ा जाते हैं और कहने लगते हैं कि भूख-प्यास दोषी है। हम अकारण ही लोगों पर शक करते हैं या उन्हें दोष देते हैं। अपनी असफलता के लिए दूसरों को जिम्मेदार मान लेते हैं।

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