ये प्राचीन गर्भनिरोधक तरीके जानकर उड़ जायेंगे आपके होश…

समय इतनी तेजी से बदला है कोई इसका अंदाजा नही कर सकता है। लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती है जिनकी मानव को सदियों से जरूरत पड़ती रही है और उस समय का इन्सान भी किसी ना किसी तरह से उन चीजों की आपूर्ति करता था और ऐसी ही एक जरूरत थी गर्भ की निरोधकता।

आजकल तो मार्केट में बहुत सारे ऐसे प्रोड्क्ट्स हैं जो इस जरूरत को देखते हुऐ बनाये गयें हैं, चाहे वो रब्बर हो या खाने की दवाई, गोली लेकिन प्राचीन समय में जब ये चीजें उपलब्द नहीं थी तो लोग इस के बिना कैसे अपनी जरूरत पूरी करते थे, आज हम आपको उनके कुछ ऐसे ही तरिकों के बारें में बताने की कोशिश करेंगे जिनको जानकर आप भी हैरान रह जायेंगे…!

महिलाए होती हैं चाँद से गर्भवती: कुछ जानकारों का मानना है कि गर्भ से बचने के लिए ग्रीनलैंड में महिलाएं चाँद की तरफ पीठ करके सोती थी और सोते समय अपनी नाभि पर अपना थूक लगाती थी।

तेल औऱ पारा का घोल: चीन में महिलाओं के गर्भ को रोकने या नष्ट करने के लिये उनको तेल और पारा का घोल पिलाया जाता था। पारा शरीर में जहर का काम करता है और गर्भ को मार देता है। साथ ही इस से महिलाओं में बांझपन की बिमारी भी लग जाती थी। इसका इस्तेमाल सिर्फ चीन में महिलाओं को पिलाया जाता था।

जैतुन का तेल: प्राचीन में ग्रीस की महिलाए शारीरिक संबंध बनाने से पहले जैतुन के तेल में देवदार का तेल मिलाकर मिश्रण को अपने गुप्तांग में लगाती थी। इससे महिलाएं गर्भवती होने से बच जाती थी।

हनी कैप का प्रयोग: आज भी इस तरीके का प्रयोग किया जाता है शारीरिक संबंध बनाने से पहले महिलाएं शहद को अपने गर्भाश्य पर लगा लेती थीं। जो गर्भधारण के लिये एक अवरोध का काम करता था।

जानवरों के आंतो से बनाने थे प्रोटेक्शन कवर: प्राचीन ग्रीक औऱ रोमन के लोग जानवरों की आंतो से अपने गुप्तांग के लिये प्रोटेक्शन कवर बना लेते थे। जो गर्भ के साथ-साथ संक्रमण से भी बचाता था।

जंगली गाजर का प्रयोग: प्राचीन की कईं जगह पर जंगली गाजर का प्रयोग भी किया गया है लेकिन ये पूरी तरहे से प्रोटेक्टिव नहीं था इसलिए इसको बाद में बंद कर दिया था।

लाइजॉल: लाइजॉल एक किटाणु नाशक कंपनी है। और एक विज्ञापन में कंपनी ने इसको गर्भ निरोधकता के लिये उपयोगी की बात भी बोल दी जिसके कारण कईं जगहों पर इसका प्रयोग किया जाने लगा। इसके प्रयोग से महिलाओं में लाइज़ॉल पॉइजनिंग की शिकायत होने लगी।

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