कैसे करें बरसात के मौसम में स्वास्थ्य की देखभाल

बरसात मे स्वास्थ्य की देखभाल की टिप्स होमयोपैथ के विशेषज्ञ डॉक्टर सी बी मेहता से।

होमयोपैथ के विशेषज्ञ डॉक्टर सी बी मेहता (धनबाद) ने संवाददाता से खास बातचीत मे उन्होंने कहा कि बार बार गर्मी एव बरसात आने से मौसम भी बदलता रहता है। जिसमे थोडी सी असावधानी से कोई भी आदमी बिमार हो जाता है, बदहजमी, गैस, खांसी -जुकाम के अलावा पीलिया वह है।जा भी हो जाया करता है। इसलिए इस मौसम मे विशेष रुप से सावधानी रखने का प्रावधान हमारे होम्योपैथी मे रखा गया है।

प्रकृति प्रदत्त मौसम अपने समयानुसार बदलते रहते है। हर मौसम अपनी विशेषता लिए हुए होता है एव अपनी सुगंध बिखेरता है। वर्षा त्रतु मे इसकी मनोहर छटा देखते ही बनती है। हर जगह भीनी भीनी सुगन्ध एव हरियाली का दृष्य नजर आता है। बरसात की फुहार सबको अच्छी लगती है। इसलिए इसका इन्तजार सबको रहता है। इस मौसम पूर्व देश के अनेक हिस्से विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र मै भीषण गर्मी पडती है। जल की कमी सवत्र नजर आती है।

  • तन व मन को संयमित रखने के कारन

वर्षा का पानी पृथ्वी के सम्पर्क मे आने से दूषित हो जाता है। जगह-जगह बाढ नदी नाले का पानी को नगर जल संग्रहण क्षेत्र मे पहुंचकर पानी को ओर अधिक दूषित कर उसे भारी बना देता है।

कीटाणु नाशक दवाईयो से पानी प्रकृतिक स्वच्छता एव स्वास्थ्य के गुणो से रहित हो जाता है। ऐसे पानी से अम्ल एव विषाक इत्यादि मे शीघ्र विरधी होती है। जिससे उदर रोग होने की सम्भावना रहती है।

  • फलो व सब्जी मे स्वत

कीटाणु पनपते है। पत्तेदार सब्जी मे तो इनकी बहुतायत रहती है। कूलर मे संग्रहित पानी मे भी मछर पैदा हो जाते है। जो बीमारिया फैलाने मे सहयोग करते है। धर के बाहर कुडे करकट मे गली मे रुके हुए पानी मे तथा नलियो के पानी मे मछर वह कीटाणु की उत्पत्ति सहज मे होती है।

शरीर मे आंतरिक रुप से प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाने से सिरदर्द जुकाम बदन दर्द मलेरिया उल्टी होना डेगु ज्वर पहले दस्त पीलिया टाइफाइड इत्यादि बीमारिया होने की सम्भावना बढ जाती है। कोई भी व्यक्ति बीमार नही होना चाहता है। परन्तु थोडी सी असावधानी से बीमारी उसे जकड लेटी है।

  • क्या करे

पानी को उबालकर कर ठंडा कर के यानी पुन शुध्द कर के ही पीए खाना बनाते समय खाना परोसते समय वह खाने के समय हाथ अच्छी तरह साबुन से साफ करे रसोई धर के बर्तन साफ रखे रसोईघर मे धुप को आने दे एग्जेसत फेन का उपयोग करेंगे सम्भव हो तो कुछ समय के लिए बर्तन को भी धुप मे रखे अपने स्वयं के कपडे वह बिस्तर साफ व स्वच्छ रखे कीटाणु रहित रखने के लिए आवश्यक पदार्थ का उपयोग करे।

सब्जी व फलो को अच्छी तरह से घोने के बाद उपयोग करे घर के आसपास कीटाणु नाशक दवाईयो से या फिनाइल का उपयोग करे।

  • भोजन

वर्षा काल मे भोजन सुपाच्य ताजा सात्विक कम धी व तेल युक्त गर्म गर्म लेना चाहिए भोजन मे एक समय खिचड़ी मूंग की दाल चावल वह सब्जी के साथ या दलिया सब्जी के साथ लिया जाना स्वास्थ्य के लिए ठीक रहता है। भुख से कम भोजन करे भोजन करते समय बीच मे पानी नही पीना चाहिए बहुत जरुरी हो तो हल्का गर्म पानी थोडी मात्रा मे लिया जा सकता है। ओर अधिक जानकारी के लिए होमयोपैथ के विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श ले सकते

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