ये ट्रांसजेंडर कभी भीख मांगने को थी मजबूर, बनी पहली जज

“यह जोइता मंडल के समुदाय के लिए ऐतिहासिक क्षण था। कभी गुजर बसर के लिए भीख मांगने के लिए मजबूर जोइता मंडल अब लोक अदालत में जज बन गई हैं। जोइता के लिए यह मुकाम इसलिए भी खास है क्योंकि वह ट्रांसजेंडर हैं। लेकिन उनके लिए यह सफर इतना आसान नहीं था।”

जोइता ने बीते शनिवार को पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर की लोक अदालत में जज की गाड़ी में बैठ कर प्रवेश किया। उन्हें लोक अदालत के लिए इस्लामपुर के सब डिविजनल लीगल सर्विस कमेटी की तफ से एक बेंच के लिए नियुक्त किया गया है। एक वक्त ऐसा भी था जब ट्रांसजेंडर होने की वजह से जोइता को इसी इस्लामपुर में रहने के लिए होटल में कमरा भी नहीं मिला था।

जोयिता मंडल देश की पहली ट्रांसजेंडर हैं जिसे राष्ट्रीय लोक अदालत में जगह मिली है। ट्रांसजेंडरों के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता अभीना अहर ने टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार से कहा कि ये केवल सशक्तिकरण का मसला नहीं है बल्कि ये ट्रांसजेडरों को व्यवस्था में स्वीकार करने और उनके अधिकार देने का मुद्दा है जिससे वो बदलाव में भागीदार बन सकेंगे। राष्ट्रीय लोक अदालत में उनके अलावा एक एडिशनल सेशन जज और एक वकील भी शामिल हैं। जोयिता साल 2011 से ही सामाजिक कार्य से जुड़ी हुई हैं। लोक अदालत में जोयिता को बैड-लोन (बकाया कर्ज) से जुड़े मामले सुनने होंगे।

जोइता की नियुक्ति उस सोच पर करारा प्रभाव है जो लैंगिग भेदभाव से भरी हुई है। जोइता को “लर्न्ड जज” की कैटेगरी में रखा गया है। जोइता दिजनापुर नोतुन आलो सासाइटी की फाउंडिंग मेंबर भी है। एक वक्त था जब रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए उनके पास कोई नौकरी नहीं थी और उन पर दबाव था कि वह या तो भीख मांगे या बधाई पार्टी में शामिल हो जाएं जो शादी या बच्चे के जन्म के वक्त पैसे लेने घरों में जाती है। ट्रांसजेंडर्स की कम्यूनिटी को आशा है कि अब उनके हक में और अच्छे काम होंगे।

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