भारतीय मूल की महिला के 2 डिजिटली जुड़वां बच्चे को दिया जन्म

ब्रिटेन में भारतीय मूल की एक महिला ने दुनिया के पहले डिजिटली मॉनीटर्ड ट्विंस को जन्म दिया।

भारतीय मूल की एक महिला दो डिजिटल जुड़वा बच्चों की मां बन गई है। यह दुनिया की ऐसी पहली मां है। जिसने अपने गर्भ में पल रहे जुड़वा बच्चों को डिजिटल निगरानी में रखते हुए बच्चों के ग्रोथ की पूरी जानकारी एकत्रित कराने में मदद की।

भारतीय मूल की माला वस्त धुरी ने दक्षिणी लंदन के सैंट जॉर्ज अस्पताल में दो स्वस्थ जुड़वा बच्चों को जन्म दिया है। जो ऑपरेशन से जन्मे है। इन बच्चों को कोख में ही लाइफ सेविंग डिजिटल ग्रोथ चार्ट के जरिए मॉनीटर किया गया था। जुड़वां बच्चों को जन्म देने के बाद माला वस्त धुरी (37) ने कहा कि मेरे पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे हैं। इन बच्चों का नाम कियान और कुश रखा है।

स्थानीय मीडिया के अनुसार 35 वर्षीय इस महिला के बच्चों का डिजिटल चार्ट तैयार किया गया है। गर्भ में जुड़वा बच्चों के 10,000 से ज्यादा स्कैन का रिकॉर्ड तैयार किया गया है। इससे डॉक्टरों को बच्चों के सामान्य विकास और जुड़वा बच्चे होने की दशा में किस तरह उन्हें बेहतर तरीके से विकसित किया जा सके, इसको जानने में मदद मिलेगी।

बच्चों के जन्म में क्या खास था?

यूके ट्विंस एंड मल्टीपल बर्थ्स एसोसिएशन ने कोख में ही ट्विंस के 10,000 स्कैन करने के के लिए फंड इकट्ठा किया। इसके पीछे मकसद ये था कि एक बच्चे के जन्म की तुलना में ट्विंस की देखभाल और डेवलपमेंट के लिए चार्ट तैयार किया जा सके।

प्रोजेक्ट को लीड कर रही मल्टीपल बर्थ एक्सपर्ट डॉ. आस्मा खलील ने कहा, “इस प्रोजेक्ट के जरिए हम हर साल अगर हजारों जानें नहीं बचा सकते हैं, तो कम से कम सैकड़ों की जान तो बचा ही सकते हैं।” डॉ. खलील ने कहा, “ब्रिटेन में इस साल सिंगल बच्चों के जन्म के दौरान मृत बच्चे पैदा होने की दर में कमी आई है। हालांकि, इसके उलट ट्विंस या मल्टीपल बेबीज के मामलों में मृत बच्चों के पैदा होने की दर 10% तक बढ़ गई है।””ये सभी जानते हैं कि ट्विंस सिंगल बच्चों के मुकाबले छोटे होते हैं। पुराने चार्ट का इस्तेमाल करने का मतलब ये है कि डॉक्टर को अपने फैसले पर निर्भर रहना पड़ता है। इन हालत में ग्रोथ प्रॉब्लम्स से निपटने के लिए जरूरत से ज्यादा डाइग्नोसिस भी हो जात है। जिसका मतलब है कि अक्सर बच्चों का वक्त से पहले जन्म करवाना पड़ता है।”

“अगर कोख में बच्चे हैं तो इस बात की तीन गुना आशंका रहती है कि बच्चा मृत पैदा हो या फिर छह गुना ज्यादा ऐसी आशंका रहती है कि बच्चे को सेरेब्रल पाल्सी (मस्तिष्क पक्षाघात) हो जाए।” “अगर माला (ट्विंस को जन्म देने वाली महिला) का सिंगल बच्चे के हिसाब से ख्याल रखा होता तो बच्चों का जन्म दो या तीन हफ्ते पहले होता। सिंगल बच्चों के ग्रोथ चार्ट से कम्पेयर करने से काफी परेशानी होती है, जिनके नतीजे प्री मेच्योर डिलिवरी, डिसएबिलिटीज और स्टिलबर्थ के रूप में सामने आते हैं।”

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