तिरंगे से जुड़ी रोचक जानकारी

भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे से जुड़ी रोचक कहानी

प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक ध्वज होता है। ध्वज एक स्वतंत्र देश होने का संकेत है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की अभिकल्पना पिंगली वैंकैयानन्द ने की थी और इसे इसके वर्तमान स्वरूप में देश की आजादी के कुछ दिन पहले 22 जुलाई 1947 को आयोजित की गई भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था।

इसे 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के बीच भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया और इसके पश्चात भारतीय गणतंत्र ने इसे अपनाया। भारत में ‘तिरंगे’ का अर्थ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज है। क्लिक करके देखिए कि तिरंगा अपने वर्तमान स्वरूप में कैसे आया…?

रंग का राष्ट्रीय ध्वज: सर्वप्रथम महात्मा गांधी ने भारत के अप्रैल, 1921 में अपने जर्नल यंग इंडिया में देश के लिए राष्ट्रीय ध्वज की जरूरत की बात की थी। उन्होंने 2 रंगों (केसरिया और हरा) वाला यह राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने का काम मछलीपट्टनम के निवासी पिंगली वैंकेयानन्द को दिया था। इस झंडे में प्रयोग किए गए दोनों रंगों में केसरिया रंग को हिन्दू और हरे रंग को मुस्लिम समुदाय का प्रतीक माना गया था। महात्मा गांधी ने लाला हंसराज के कहे मुताबिक इस झंडे के बीच में चरखा जोड़ने का सुझाव इसलिए दिया था ताकि इससे यह प्रमाणित हो सके कि यह झंडा स्वदेशी (भारत में निर्मित) कपड़े से बनाया गया है। गांधी जी 1921 के कांग्रेस सेशन में इस ध्वज को प्रस्तुत करना चाहते थे, लेकिन झंडा समय पर तैयार न हो सका।

जुड़ा तीसरा रंग: बाद में गांधी जी ने कहा कि यह अच्छा ही हुआ, क्योंकि इसी बहाने उन्हें यह सोचने का अवसर मिला कि यह झंडा केवल 2 धर्मों का ही प्रतिनिधित्व कर रहा है, इसलिए फिर इसमें बाकी धर्मों के लिए सफेद रंग जोड़ा गया। बाद में 1929 में 3 रंग के इस झंडे की व्याख्या गांधी जी ने इस तरह की- केसरिया रंग लोगों के बलिदान के लिए, सफेद रंग पवित्रता के लिए और हरा रंग उम्मीद के लिए।

स्वराज झंडे का निर्माण: स्वतंत्रता आंदोलन के समय में खिलाफत आंदोलन में 3 रंग वाले स्वराज झंडे का प्रयोग हुआ। इस आंदोलन में मोतीलाल नेहरू ने स्वराज झंडे को थामा और 1931 में कांग्रेस ने ही स्वराज झंडे को राष्ट्रीय ध्वज की स्वीकृति प्रदान की। स्वीकृति प्राप्त इस स्वराज झंडे में ऊपर केसरिया रंग बीच में सफेद रंग और नीचे हरा रंग था। जिसके बीच में नीले रंग का बना हुआ चरखा था।

नया तिरंगा 1947 में आया: देश आजाद होने के बाद संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 22 जुलाई 1947 में वर्तमान तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया, जिसमें 3 रंग थे- ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंगा। सफेद रंग की पट्टी में नीले रंग से बना था अशोक चक्र, जिसमें 24 तीलियां थीं जो धर्म और कानून का प्रतिनिधित्व करती थीं। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का वही स्वरूप आज भी मौजूद है।

 

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