प्लानिंग स्किल अच्छी है, तो इस क्षेत्र में बनाएं करियर

बाजार में कई नए उत्पाद आते ही लोगों के दिलो-दिमाग पर छा जाते हैं। कई ब्रांड्स के तो स्लोगन भी आपको याद होंगे। दरअसल, इस सबके पीछे प्रोडक्ट मैनेजमेंट की बड़ी भूमिका है। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई इसी फील्ड से निकलकर आज एक बड़ा नाम बन चुके हैं। बतौर प्रोडक्ट मैनेजर ऐसे लोग उपभोक्ता का मूड बहुत अच्छी तरह समझते हैं। उनमें प्रोडक्ट की ब्रांडिंग स्किल कमाल की होती है। यूं कहें कि इनकी देखरेख में ही नए-नए प्रोडक्ट बनते और लॉन्च होते हैं। यही वजह है कि कंपनियों के ब्रांड डेवलपमेंट विंग में इन दिनों यह जॉब ‘इन डिमांडठ है।

☆ करियर स्कोप

ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन काउंसिल (जीएमएसी) के हालिया वार्षिक सर्वे के मुताबिक विश्व भर के करीब 96 प्रतिशत नियोक्ताओं का भरोसा सिर्फ एमबीए ग्रेजुएट्स पर है। इनका मानना है कि ऐसे प्रोफेशनल्स की वजह से ही उनकी कंपनियों को सही वैल्यू मिलती है। करियर विशेषज्ञों का मानना है कि स्टार्ट-अप सेक्टर में आए बूम और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों की वजह से आने वाले दिनों में एंटरप्रेन्योर्स की तादाद और ज्यादा बढ़ेगी। इससे कंज्यूमर कंपनीज के मैन्युफैक्चिंरग और प्रोडक्शन सेक्शन में प्रोडक्ट मैनेजमेंट के प्रोफेशनल्स की अच्छी डिमांड पैदा होगी और यह हो भी रही है।

☆ क्या है काम?

प्रोडक्ट मैनेजमेंट मुख्य रूप से प्रोडक्शन और ब्रांडिंग से जुड़ी फील्ड है। यह मैनेजमेंट की ही एक शाखा है। इसके अंतर्गत किसी भी नए प्रोडक्ट के आइडिएशन और प्लानिंग से लेकर मैन्युफैक्चिंरग, प्राइिंसग, पैकेिंजग, सेल्स एक्टिवविटी और ब्रांडिंग जैसी तमाम प्रक्रियाएं शामिल हैं। कंपनी में प्रोडक्ट मैनेजर आम तौर पर दो तरह की जिम्मेदारियां निभाते हैं। पहला, कंपनी के प्रोडक्ट या र्सिवस को बाजार में बनाए रखना और दूसरा, नए प्रोडक्ट या सर्विसेज विकसित करना। ऐसे प्रोफेशनल्स को कंज्यूमर रिसर्च और मार्केट रिसर्च की भी अच्छी समझ होती है। ब्रांडिंग वर्क इस पेशे का सिर्फ एक हिस्सा भर है। कंपनियों में प्रोडक्ट मैनेजर की हैसियत मिनी सीईओ जैसी होती है।

☆ पर्सनल स्किल

कंपनियों में यह एक जिम्मेदारी भरा पद है। आइडिएशन और प्लानिंग इनके करियर का अहम हिस्सा होते हैं। इसलिए उम्मीदवारों को क्रिएटिव और इनोवेटिव सोच का होना जरूरी है। वे मैथ्स और फाइनेंस की अच्छी स्किल रखते हों। इंफॉर्मेशन फिल्टिंरग के लिए एनालिटिकल एबिलिटी होनी चाहिए। टीमवर्क, लीडरशिप, कम्युनिकेशन स्किल और मार्केट ट्रैंड की समझ भी जरूरी है।

☆ आकर्षक ग्रोथ

प्रोडक्ट मैनेजमेंट भले ही नए दौर की जॉब है लेकिन यहां ग्रोथ बहुत है। पे-स्केल सर्वे के अनुसार, करीब 58 प्रतिशत प्रोडक्ट मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स को 10 साल के करियर में तीन से चार प्रमोशन आसानी से मिल जाते हैं। इस फील्ड की नियोक्ता कंपनियां एमबीए या बीटेक के बाद हायिंरग में कंसिंल्टग, फाइनेंस या एकाउंटिंग के ग्रेजुएट्स को ज्यादा तरजीह देती हैं। मार्केटिंग ग्रेजुएट और बीबीए उम्मीदवार भी मार्केटिंग असिस्टेंट या एसोसिएट ब्रांड मैनेजर के तौर पर यहां जॉब पा सकते हैं।

☆ जॉब के अवसर

अगर इस फील्ड में जॉब की बात करें, तो आईटी व आईटीईएस कंपनी, ऑटोमोबाइल कंपनी, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी, मोबाइल, फार्मास्युटिकल, हेल्थकेयर, फूड एंड पर्सनल केयर जैसी कंपनियों में जॉब की तलाश की जा सकती है। एचआर एक्सपट्र्स की मानें, तो 2016 में मैन्युफैक्चिंरग सेक्टर में करीब 6 लाख हायिंरग होने की उम्मीद है।

☆ कौन-से कोर्स?

देश में कई सरकारी और निजी संस्थान प्रोडक्ट मैनजमेंट से संबंधित कोर्स ऑफर कर रहे हैं। ये कोर्स एमबीए के अलावा, डिप्लोमा और पीजी डिप्लोमा के रूप में भी उपलब्ध हैं, जैसे पीजी डिप्लोमा इन प्रोडक्शन मैनेजमेंट, पीजी डिप्लोमा इन प्रोडक्शन एंड ऑपरेशंस मैनेजमेंट, पीजी डिप्लोमा इन प्रोडक्शन एंड मटेरियल मैनेजमेंट आदि। कई आईटी संस्थानों में प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियिंरग के रूप में भी ये कोर्स संचालित हो रहे हैं। अगर आप प्रोडक्ट मैनेजमेंट या ब्रांड मैनेजमेंट में एमबीए करना चाहते हैं, तो ग्रेजुएशन के बाद कर सकते हैं। पीजी डिप्लोमा के लिए ग्रेजुएशन जरूरी है।

☆ सैलरी पैकेज

प्रोडक्ट मैनेजमेंट एक हाई पेइंग फील्ड है। एंट्री लेवल पर असिस्टेंट मैनेजर जैसे पदों के लिए 30 हजार से 40 हजार रुपए की सैलरी प्रति माह आसानी से मिल जाती है। कुछ र्वााों के अनुभव के बाद बतौर प्रोडक्ट मैनेजर इनकी सैलरी 1 लाख रुपए से भी ज्यादा हो जाती है। डिप्लोमाधारी प्रोफेशनल्स को भी इस फील्ड में शुरूआती दौर में 15 से 20 हजार रुपए प्रति माह मिल जाते हैं।

Loading...
loading...

You might also like More from author

Comments