नवयुवतियों के साथ संभोग करता है HIV पीड़ित ‘हाइना’

अफ्रीका में एक जगह है मलावी, यहां के कुछ छोटे-मोटे गांवों में एक परम्परा है, लड़कियों को जवानी की बीमारियों से बचाने की। क्या आप जानना चाहेंगे कि ये लोग कैसे बचाते हैं अपनी बेटियों को इस बीमारी से? इस बीमारी से बचाने के लिए पहले मासिक धर्म शुरू होने के तुरंत बाद ही इनका एक एचआईवी पोजीटिव इंसान के साथ शारीरिक संबंध बनवाया जाता है।

Hyenaइनकी इस परम्परा के अनुसार, एचआईवी पोजीटिव उस इंसान को हाइना (Hyena) कहा जाता है। ये एक प्रकार का सेक्स वर्कर होता है, जो लड़कियों से संबंध बना कर उनके नारीत्त्व को जागृत करता है।’ इस अनुष्ठान के लिए 10 साल की उम्र की वो लड़कियां तैयार मानी जाती हैं, जिनका पहली बार मासिक धर्म आया हो। अगर वो लड़कियां इसके लिए मना करती हैं, तो उन्हें धमकी दी जाती है कि एक खास बीमारी से उनका और उनके परिवार का नाश हो जायेगा।

Hyena1यही नहीं, ये अनुष्ठान बस लड़कियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ये उन महिलाओं पर भी लागू किया जाता है, जिनके बच्चे की मौत हो चुकी हो, या जिनके पति की मौत हो चुकी हो। उनको अपनी ‘सफाई’ के लिए हाइना के साथ सोना पड़ता है। क्या घटिया सोच है ये। अशिक्षा और गरीबी से जूझ रहे ये लोग रोज़ाना अपने कबीले में नयी-नयी बीमारियां पैदा करवा रहे हैं। शर्म तो उन्हें आनी चाहिए, जो इनको सालों से बढ़ावा देते आ रहे हैं।

क्या कहना है हाइना का :

Eric-Anivaएरिक अनिवा (Eric Aniva)यहां के एक प्रोफेशनल हाइना हैं। इस आदमी को एक लड़की के साथ सोने के 250 से लेकर 500 रुपये दिए जाते हैं। 40 वर्षीय एरिक कहता है कि वो अब तक 104 लड़कियों के साथ इस अनुष्ठान को पूरा कर चुका है। उसे इस बात की कोई जानकारी ही नहीं है कि आज तक उसकी वजह से कितनी लड़कियों और महिलाओं को गर्भधारण करना पड़ा। वो सफाई की इस प्रक्रिया से सहमत है। इंसानियत से कोसों दूर खड़ा एरिक कहता है कि ‘मैं 13 साल से ऊपर की लड़कियों को बूढ़ी मानता हूं और ये लड़कियां मुझे अपना हाइना पाकर बहुत ही आनंद पाती हैं। ये गर्व से मेरी प्रशंसा करते हुए कहते है कि ‘ये आदमी असली मर्द है।’

इन सबको इस बात का ज़रा सा आभास नहीं है कि ये अनुष्ठान इन लड़कियों और महिलाओं को यौन रोगों से संक्रमित कर रहा है। एरिक की भी दो बेटियां हैं, जब उसकी पत्नी से पूछा गया कि क्या आप भी अपनी बेटियों को इस अनुष्ठान से गुजरने देंगी, तो उसने साफ़ मना कर दिया। एरिक की पत्नी सालों से चली आ रही इस कुप्रथा के खिलाफ है।

इस परम्परा को वहां एनजीओ और चर्च की नज़र से छुपा कर चलाया जाता है, ताकि वो इसे बंद ना करा दें। वहां के लोकल नेता कहते हैं कि ये परंपरा सड़ चुकी है, इसमें बदलाव की ज़रूरत है। मालवीन मिनिस्ट्री ऑफ़ जेंडर एंड वेलफेयर के एक प्रतिनिधि डॉ. माय शबा ने कहा कि ‘हम सीधे उन्हें दंडित नहीं कर सकते। हम उन्हें शिक्षित करेंगे, जिससे आगे ऐसी कुरीतियों को हवा ना मिले’।

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