ये 10 आदतें दिलाएगी ‘आईएएस’ एग्जाम में सफलता

कोई परीक्षा कितनी टफ है, यह जानने के लिए उसके सक्सेस रेशो को देखना चाहिए। इस मापदंड से सिविल सर्विसेज एग्जाम या आईएएस एग्जाम को सबसे कठिन परीक्षा कहा जा सकता है। इसका सक्सेस रेशो 0.01 प्रतिशत है! ऐसी परीक्षा में सफलता पाने के लिए केवल प्रतिबद्धता, तैयारी और किस्मत ही काफी नहीं होती।

इसके लिए जरूरी हो जाता है कि उम्मीदवार आईएएस की तैयारी को अपनी जीवनशैली ही बना डाले। पहले-पहल यह बहुत बोझिल लग सकता है लेकिन यदि आप आईएएस परीक्षा को क्लियर करने को लेकर समर्पित और गंभीर हैं, तो इसकी तैयारी का इससे बेहतर कोई तरीका नहीं है। आईएएस की तैयारी को अपनी जीवनशैली में शामिल करने के लिए जरूरी है कि आप इन दस आदतों को अपना लें…।

1. टाइमटेबल बनाएं

अगर आप आईएएस परीक्षा में सफलता पाना चाहते हैं, तो आपको यह बताने की जरूरत नहीं कि पढ़ाई के लिए टाइमटेबल बनाना कितना जरूरी है। आपका टाइमटेबल ऐसा हो, जो पढ़ाई के घंटों, आराम, फिजिकल एक्टिविटी और सोशल लाइफ सभी के बीच संतुलन बनाकर चले। सारा समय सिर्फ पढ़ाई करते रहने से एकरसता आ जाएगी और पढ़ाई में आपका मन ही नहीं लगेगा। इसके साथ ही, आप दो-तीन अलग-अलग टाइम शेडयूल बना लें, जिनमें आपकी पढ़ाई के दैनिक, साप्ताहिक और मासिक लक्ष्य निर्धारित हों। इससे आप अपनी तैयारी की निगरानी कर पाएंगे और जहां जरूरी हो, वहां सुधार ला पाएंगे।

2. कॉन्सेप्ट क्लियर रखें

आईएएस परीक्षा का सिलेबस बहुत वृहद है और किसी विााय की पूरी लंबाई-चौड़ाई नाप डालता है। ऐसे में कई उम्मीदवार तथ्यों को रट लेते हैं, बजाय उनका कॉन्सेप्ट समझने के। यह तरीका बिल्कुल गलत है। हमारी याददाश्त केवल एक सीमित डेटा ही स्टोर कर सकती है और यह भी समय के साथ धूमिल पड़ती जाती है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप जो भी पढ़ें, उसकी मूल अवधारणा को गहराई से समझें। अगर आप किसी टॉपिक को अच्छी तरह समझ लेंगे, तो उससे जुड़ी तमाम जानकारी अच्छी तरह याद भी रख पाएंगे।

3. राइिंटग स्किल विकसित करें

कई आईएएस उम्मीदवार केवल प्रिलिमिनरी एग्जाम पर ही फोकस करते हैं, जोकि ऑब्जेक्टिव टाइप परीक्षा है। शुरू-शुरू में यह रणनीति सही लग सकती है लेकिन आगे चलकर आपको अहसास होगा कि यह गलत है। आईएएस की मेन परीक्षा परंपरागत सब्जेक्टिव टाइप परीक्षा है, जिसमें आपको हाथ से उत्तर लिखने होंगे। इसलिए अगर आप मेन परीक्षा में भी सफल होना चाहते हैं, तो बेहतर होगा कि आप प्रिलिम्स स्तर से ही अपनी राइिंटग स्किल में निखार लाना शुरू कर दें। कई जानकारों का मत है कि लिखकर पढ़ाई करना न सिर्फ तथ्यात्मक सूचनाओं को याद रखने के सबसे अच्छे तरीकों में से एक है, बल्कि यह उत्तरों का फॉर्मेट विकसित करने में भी मददगार है, जोकि मेन परीक्षा में लाभ देता है।

4. अखबारों से दोस्ती

अखबार किसी आईएएस उम्मीदवार के सबसे अच्छे दोस्त होते हैं। आपको रोज अखबार पढ़ने की आदत डालनी ही चाहिए। मगर इतना ही काफी नहीं है। आपको उन टॉपिक्स की पहचान भी होनी चाहिए, जिन पर आपको ज्यादा फोकस करना है। अखबार पढ़ना शुरू करने से पहले खुद से पूछें कि आपको क्या पढ़ना चाहिए, क्यों पढ़ना चाहिए और कहां पढ़ना चाहिए। इस प्रकार आप वही पढ़ेंगे, जो पढ़ना जरूरी है और रोज-ब-रोज आवश्यक सूचनाएं इकट्ठी करते चलेंगे।

5. सरकारी वेबसाइट्स पर नजर

अधिकांश आईएएस उम्मीदवारों का इस बात पर ध्यान ही नहीं जाता कि सरकारी वेबसाइट्स नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों, डेटा और रिपोर्टों का सरल, सुगम स्रोत हैं। इन वेबसाइट्स का अध्ययन कर आप जो सूचनाएं पाएंगे और जो समझ विकसित करेंगे, वह प्रिलिम्स और मेन्स दोनों में लाभदायक रहेगी।

6. क्वॉलिटी डिस्कशन

किसी आईएएस उम्मीदवार को अपने साथी उम्मीदवारों और टीचर्स व कोिंचग इंस्ट्रक्टर्स के साथ स्वस्थ और उच्च कोटि के डिस्कशन करते रहना चाहिए। इन चर्चाओं में किसी एक टॉपिक पर फोकस करें, उसे अलग-अलग नजरियों से देखें और अपनी बात को प्रामाणिक डेटा के आधार पर आगे बढ़ाएं। किसी टॉपिक पर अलग-अलग नजरिये सामने आने पर आप परीक्षा में अधिक संतुलित और परिपूर्ण उत्तर दे पाएंगे। ऐसे किसी डिस्कशन ग्रुप का सदस्य बनने से पढ़ाई के लिए प्रेरणा भी मिलती रहती है। साथ ही इससे इंटरव्यू की तैयारी में भी मदद मिलती है।

7. प्रॉब्लम सॉिंल्वग एटिटयूड

परीक्षा में सफल होने के लिए ही नहीं, आईएएस अधिकारी के रूप में काम करने के दौरान भी आपको प्रॉब्लम सॉिंल्वग स्किल की दरकार होगी। आपके सामने कई चुनौतियां आएंगीं, जिनसे आपको नई-नई तकनीकों से निपटना होगा। आपको वृहद सिलेबस को पढ़ने, टाइम मैनेजमेंट, संसाधनों, पियर प्रेशर, समाज के प्रेशर आदि की चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। ऐसी स्थितियों में आपका प्रॉब्लम सॉिंल्वग एटिटयूड ही काम आएगा।

8. अपने टीचर खुद बनें

आईएएस की तैयारी करना बहुत लंबा और थका देने वाला काम है। इसका सिलेबस मानो लगातार बढ़ता जाता है और समय लगातार कम होता जाता है। ऐसे में किसी एक टीचर, गाइड, मेंटर या किसी एक कोिंचग क्लास मटेरियल पर निर्भर रहने से बात नहीं बनने वाली। आपको खुद अपना टीचर बनना होगा। आप खुद ही प्रश्न तैयार करें और रेफरेंस तथा स्टडी मटेरियल के इस्तेमाल से उनके उत्तर तलाशें। टीचर और स्टूडेंट दोनों की भूमिकाएं खुद निभाने से आपके भीतर आत्मविश्वास का भी संचार होगा, जो परीक्षा में और उसके बाद भी काम आएगा।

9. स्वस्थ जीवनशैली

‘केवल काम, नहीं आराम’ की नीति आईएएस की तैयारी में कारगर नहीं हो सकती। ढेर सारी किताबों के साथ खुद को कमरे में बंद करके आज तक कोई आईएएस परीक्षा क्लियर नहीं कर पाया है। आपको अपने स्वास्थ्य, मनोरंजन तथा सामाजिक जीवन पर भी ध्यान देना चाहिए। योग, ध्यान या फिर रिंनग, स्पोर्ट्स आदि के लिए रोज समय जरूर निकालें। पौष्टिक भोजन और रोज कम से कम 8 घंटे की नींद लें। परिवार के साथ तो समय बिताएं ही, ऐसे दोस्त भी बनाएं जिनके लक्ष्य आपसे मिलते-जुलते हों। इससे आपका फोकस बना रहेगा और आपको प्रेरणा मिलती रहेगी।

10. प्रतिबद्धता और समर्पण

आईएएस परीक्षा में सफलता का सफर बहुत लंबा और मुश्किल है। आपकी प्रतिबद्धता ही इस सफर को पूरा करने में आपके काम आएगी। आपके सामने ऐसी कई चुनौतियां और समस्याएं आएंगीं, जिनसे आपके कदम डगमगा सकते हैं। कई ऐसे युवा भी हैं, जिन्होंने आईएएस की तैयारी में 5 से 7 साल लगा देने का बाद सामाजिक दबाव या फिर लगातार नाकामी के चलते हार मान ली। ऐसी तमाम चुनौतियों के बावजूद, यह भी सच है कि हर साल मुट्ठी भर उम्मीदवार अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इस परीक्षा को व्रैâक कर ही लेते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आपको खुद पर विश्वास हो और अपने लक्ष्य के प्रति आपमें समर्पण हो।

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