इस डिजिटल दुनिया में है ‘मोबाइल एप डेवलपर’ में सुनहरा भविष्य

आज कल दुनिया के अधिकतर लोग मोबाइल इस्तेमाल कर रहे हैं। इस व्यस्त जीवनशैली में लोगों के पास समय की भारी कमी रहती है। कई कामों के लिए अलग-अलग समय निकालना मुश्किल है, इसलिए लोग अब चाहते हैं कि उन्हे अधिक से अधिक चीजें मोबाइल पर उपलब्ध हो जाए। जिससे वह अपने खाली वव्त उन जरूरी कामों को निपटा सकें। आवश्यक कार्यों के अतिरिव्त लोग अपने मोबाइल पर क्रिकेट स्कोर, वीडियो, मूवी आदि भी देखना पसंद करते हैं। वव्त के साथ लोगों की जरूरतें बढ़ती जा रही है। आने वाले दिनों में लोग अपने अन्य कई सारे कार्य और शौक मोबाइल पर ही पूरा करना पसंद करेगें।

प्रोग्रामरों को ऑब्जेक्टिव-सी आनी चाहिए। तकनीकी जानकारी के अतिरिक्त एक बेहतरीन डिवैल्पर को लोगों की मांगोें और और नेटवर्क पर एप के प्रभाव के बारे में जानना बेहद जरूरी है। वे कम्पनी के अन्य विभागों के साथ आपस में मिल-जुल कर काम करते हैं जिससे कि मौजूदा एप को और बेहतर बना सकें। साथ ही वे पारंपरिक डैस्कटॉप साफ्टवेयर को मोबाइल प्लेटफार्म पर लाने की कोशिश करते हैं।

अमेरिका में एप डिवैल्पर की औसतन तनख्वाह 95,000 डालर है, जबकि भारत में शुरूआती स्तर पर उन्हें 3-5 लाख रुपए सालाना का पैकेज मिल रहा है लेकिन काम करने का समय अधिक हो सकता हैं और उन्हें दबाव के बीच कार्य करना पड़ सकता है। सूचना तकनीक के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं से संबंधित विशेषज्ञों के मुताबिक मोबाइल एप्लीकेशन विकसित करने का काम आने वाले वर्षों में पहले पायदान पर होगा। सूचना तकनीक के क्षेत्र में मोबाइल एप्लीकेशन विकसित करने के काम में बहुत बड़ी खाई दिख रही है। जॉब के मुकाबले काम करने वाले प्रतिभावान लोगों की कमी है। अमेरिकी श्रम एवं सांख्यकी ब्यूरो के आंकड़ों पर आधारित एक अध्ययन के मुताबिक यह करियर 2020 तक बढना जारी रहेगा।

मोबाइल एप से ग्राहकों को सूचनाओं, मनोरंजन, अपने कामकाज, शिक्षा, खरीददारी, मेलजोल आदि के लिए संपर्प में रहने का नया और सबसे बेहतरीन तरीका मिलता है। ये एप या तो बेचे जाते हैं या फिर एप्पल के एप स्टोर या फिर एनड्राॅइड गूगल प्ले जैसे वर्चुअल मार्केट से मुफ्त में प्राप्त

किए जा सकते हैं। लम्बे वव्त से स्थापित संस्थान जो व्रेताओं तक तुरंत पहुंचना चाहती हैं या फिर नवोदित कम्पनियां जो नए बाजार का एक हिस्सा हथियाना चाहती हैं, सभी को एप विकसित करने वालों की जरूरत होती है जिससे कि ग्राहकों से सीधे जुड़ने का एक ऐसा यूकार इंटरफेस बना सकें जो उन्हें सफल बनाए।

हालांकि बहुत से एप बनाने वाले लोग कम्पनियों के कर्मचारियों के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन कुछ उद्यमी होते हैं जो एप्पल जैसी हार्डवेयर बनाने वाली कम्पनियों के इस प्रयत्न का फायदा उठाते हैं कि प्रोग्राम डिजाइन का बल लोगों तक पहुंचे। नए किस्म के एप बनाने वालों को यह ओपन साॅर्स माडल प्रोत्साहित करता है। इसके लिए सरलता से उपयोग में आ सकने वाले साफ्टवेयर डिवैल्पमैंट किट का प्रयोग होता है। इसके अतिरिव्त अपने खुद के एप लिखने वालों के लिए सपोर्ट फोरम भी होते हैं इसलिए कोई बड़े विचार वाला व्यव्ति कम संसाधन होने के बावजूद अपने वव्त और प्रतिबद्धता के बूते अकेले ही कार्य कर सफल एप जारी कर सकता है। सिलिकाॅन वैली में फुटबाल प्रशिक्षक टिम न्यूसम ने हाल ही में अपनी पहली एप्लीकेशन स्किल्ज एंड ड्रिल्ज जारी की जिसमें उन्होंने कोड लिखने में अपने भाई की सहायता ली।

किसी बड़ी कम्पनी में एप डिवैल्पर की जाॅब की ढूढ़ने वाले व्यव्ति के लिए यह जानना सहायक होगा कि कई बार कम्पनियां बहुत से प्लेटफार्म के लिए एक साथ एप जारी करने के बारे में सोचती हैं इसलिए एक से ज्यादा प्लेटफार्म पर काम कर सकने वाले एप डिवैल्पर की मांग अधिक रहती है। मौजूदा वव्त में एनड्राइड प्रोग्रामरों को जावा, सी प्लस प्लस और एप्पल आई.ओ.एस जिसका प्रयोग पहले आईफोन आप्रेटिंग सिस्टम के लिए होता था लेकिन अब आईपैड और एप्पल टी.वी. के लिए भी इसका उपयोग किया जाने लगा है।

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