एनसीसी से होता है युवाओं का भविष्य निर्माण

एनसीसी यानी नेशनल कैडेट कोर, जो कॉलेज के अनुशासित और देशभक्त युवाओं को भविष्य के लिए नेतृत्व प्रदान करता है। यह सेना के तीनों अंगों को आगे चलकर अपने हुनर और कुशल प्रशिक्षण से मजबूती प्रदान करता है चाहे थल सेना, वायु सेना या नौसेना हो, एनसीसी से जुड़े युवाओं की विशेष कोटे के जरिए भर्ती की जाती है।

इसे सैन्य बल की दूसरी पंक्ति भी कहा जाता है जो इसलिए तैयार की जाती है जो युद्ध या अन्य आपदाओं में मौका पड़ने पर काम आ सके। स्कूल और कॉलेज में भविष्य के लीडर के रूप में इसकी ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग देश में कैरियर के रूप में जगह-जगह काम आती है। इसकी इस उपयोगिता को देखते हुए ही देश सेवा और सैन्य बल में जाने की इच्छा रखने वाले हजारों युवा इसमें हर साल बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। इस क्षेत्र में जो युवा आना चाहते हैं, उनके लिए करियर के कई अवसर हैं। जरूरत है, इनमें जाने और अपनी जगह बनाने की। सैन्य सेवाओं के लिए होने वाली भर्ती में एनसीसी सर्टिफिकेट धारक के लिए विशेष रूप से पद आरक्षित हैं।

इस कड़ी में आर्मी की बात करें तो यहां इंडियन मिलिट्री एकेडमी में हर साल 64 पद एनसीसी के लिए आरक्षित हैं जो यूपीएससी और एसएसबी इंटरव्यू के माध्यम सेभरता है। इसी तरह ऑफीसर ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई में भी 100 सीटें आरक्षित हैं जो एसएससी के जरिए भरी जाती है। यह गैर तकनीकी शाखा का पद है। यूपीएससी इसकी परीक्षा नहीं लेती है। एसएसबी का इंटरव्यू होता है। नेवी में प्रत्येक कोर्स में हर साल छह पद आरक्षित हो ते हैं। इसमें लिखित परीक्षा नहीं होता। एसएसबी का इंटरव्यू होता है।

सर्टिफिकेट वालों को उम्र में दो साल की छूट मिलती है। इंडियन एयर फोर्स के हरेक कोर्स में एनसीसी के लिए 10 फीसद सीटें आरक्षित होती हैं। सिर्फ इंटरव्यू के जरिए इनमें भर्ती होती है। यूपीएससी की परीक्षा नहीं होती। सेलर, एयरमेन और ओआर की भर्ती में भी एनसीसी को पांच से 10 फीसद तक बोनस अंक दिया जाता है। सामान्य भर्ती में पैरा मिलिट्री फोर्स में भर्ती में दो से दस फीसद तक बोनस अंक एनसीसी वालों को मिलता है। इसी तरह कम्युनिकेशन विभाग में भर्ती के दौरान इन्हें बोनस अंक मिलता है।

एनसीसी में ऐसे युवक और युवतियां सिविल ग्लाइिंडग इंस्ट्रक्टर और पूर्णकालिक लेडी अधिकारी भी नियुक्त होती हैं। इनके अलावा, राज्य सरकार की नौकरियों में होने वाली भर्ती में एनसीसी को कुछ पदों पर विशेष प्राथमिकता दी जाती है। निजी कंपनियां और उद्योग ऐसे युवाओं को अपने यहां सुरक्षा आदि विभागों में प्राथमिकता देकर भर्ती करते हैं। इसका बड़ा उदाहरण रिलायंस इंडस्ट्री है। इसके अलावा, एनसीसी वालों को एक खेल आदि में टीम के रूप में प्रदर्शन करने पर नकद पुरस्कार और व्यक्तिगत तौर पर भी सम्मानित किया जाता है। उन्हें राज्य और केंद्र स्तर पर होने वाले प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का मौका दिया जाता है।

कोर्स : एनसीसी में शामिल होने पर साल भर के अंदर कॉलेज में इसके लिए अलग से क्लास होती है। एक सप्ताह में 40 मिनट की छह क्लासें होती हैं। साल में 120 पीरियड करने होते हैं। एनसीसी में शामिल होने के लिए छात्र को मेडिकल स्तर पर फिट होनी चाहिए। दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में एनसीसी विभाग के प्रभारी डॉ. एसके कौशिक के मुताबिक, एनसीसी में छात्रों को क्लास के दौरान ड्रिल पढ़ाया जाता है।

इसमें उन्हें सावधान, विश्राम, दायें और बाएं मुड़ जैसे अभ्यास से गुजरना होता है। उन्हें फील्ड क्राफ्ट जैसे समाज सेवा, मैन मैनेजमेंट, मैप रीडिंग, राइफल खोलना, जोड़ना व उसके कलपुर्जे के बारे में अवगत कराया जाता है। इस तरह के ड्रिल कराकर उनमें नेतृत्व का गुण भी पैदा किया जाता है। पहले साल के बाद दूसरे साल में छात्रों को गंभीरता और अभ्यास में महारत हासिल हो जाती है। स्कूल स्तर पर इससे जुड़े जो भी कार्य कराए जाते हैं वे मोटिवेशनल होते हैं।

उसका करियर के लिहाज से कोई फायदा नहीं है। हां, एक फायदा है अगर स्कूल में एनसीसी में सक्रिय रहें तो उच्च शिक्षा के लिए कुछ संस्थानों में दाखिले के दौरान अलग से कोटा होता है। जैसे जामिया मिल्लिया में इन्हें तवज्जो दी जाती है। दाखिले के दौरान स्नातक में इंजीनियिंरग कोर्स को छोड़कर अन्य सभी कोर्स में पांच फीसद रियायत दी जाती है। किसी कोर्स में 50 फीसद पर दाखिला हो रहा है तो वहां ऐसे छात्रों को 45 फीसद पर दाखिला मिलता है।

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